Tuesday, 3 November 2026
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बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

- बच्चों में अचानक तेज बुखार उल्टी,दस्त पेट दर्द की समस्या काफी बढ़ गई है

- ओआरएस का घोल संजीवनी के समान

केटी न्यूज/बलिया

बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

आजकल अत्यधिक गर्मी और लू का प्रकोप काफी बढ़ गया है। ऐसे मौसम में नवजात शिशु एवं बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। अचानक तापक्रम में आए उछाल की वजह से बच्चों का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है।

बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को लू से बचाने के लिए उनको भरपूर मात्रा में तरल पेय पदार्थ पिलाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि इस मौसम में बच्चों को निर्जलीकरण से बचाया जा सके। उक्त बातें जिला महिला अस्पताल स्थित प्रश्नोत्तर केंद्र पर तैनात वरिष्ठ नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सिद्धार्थ मणि दुबे ने कहीं।

बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

डॉक्टर दुबे ने बताया कि अचानक बढ़ती गर्मी के प्रकोप को बच्चे झेल नहीं पाते हैं इसलिए ऐसे मौसम में उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होती है। ओपीडी में आजकल निरंतर बीमार बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों में तेज बुखार, पेट दर्द,उल्टी, दस्त,निर्जलीकरण आदि की समस्या बहुत बढ़ गई है। ऐसे में बचाव ही एकमात्र विकल्प है।

बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

अचानक अत्यधिक तापमान के कारण बच्चों का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है जिससे वह उल्टी,दस्त व निर्जलीकरण से ग्रसित हो जाते हैं। नवजात शिशु एवं 6 महीने से कम के शिशुओं को माताएं सिर्फ स्तनपान कराती रहें। यह सुनिश्चित करें कि हर 2 घंटे पर शिशु को सिर्फ मां का दूध पिलाया जाए। बड़े बच्चों को तरल पेय  (चावल का माढ, ओआरएस का घोल, नारियल पानी, मट्ठा/छाछ,शिकंजी, जूस आदि) निरंतर अवधि पर पिलाते रहें।

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बच्चों को खाने के लिए ताजा एवं हल्का सुपाच्य भोजन ही दें। उन्हें तैलिय एवं मसालेदार खाना ना दें। बच्चों को मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा आदि खिलाना सुनिश्चित करें। अभिभावकों को बच्चों को तेज धूप एवं लू से भी बचाने का प्रयास करना चाहिए। गर्मी के मौसम में संचारी रोग के मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है

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जिसके प्रमुख कारणों में पेयजल की गंदगी भी होती है। ऐसे में अभिभावक सुनिश्चित करें कि बच्चों को पीने के लिए शुद्ध एवं ताजा पेयजल ही दिया जाए। दस्त और उल्टी होने की स्थिति में बच्चों को तत्काल ओआरएस का घोल, नारियल पानी, मट्ठा-छाछ आदि देना शुरू करें एवं नजदीकी  स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक की सलाह से ही इलाज कराएं।

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ओआरएस का घोल है वरदान: डॉ दुबे 

बलिया। डॉक्टर दुबे बताते हैं कि बढ़ती गर्मी के इस मौसम में बच्चों के लिए ओआरएस का घोल वरदान से कम नहीं है। इस मौसम में बच्चे अक्सर उल्टी और दस्त से जूझते हुए निर्जरीकरण में चले जाते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए अभिभावकों को ओआरएस के घोल को सही तरीके से बनाना एवं समुचित मात्रा में देना अवश्य आना चाहिए।

बढ़ती गर्मी में बच्चे हो रहे बीमार, बचाव ही उपाय: डॉ सिद्धार्थ

अभिभावक इस बात का ध्यान दें कि ओआरएस के घोल को शुद्ध पेयजल में और समुचित मात्रा (जितना पैकेट पर अंकित हो) के जल में ही घोलकर बनाएं एवं बीमार बच्चों को निरंतर अवधि पर पिलाते रहें। ओआरएस का पैकेट सभी सरकारी अस्पतालों में निशुल्क वितरित किया जाता है।

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