Tuesday, 3 November 2026
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Keshav Times

सुख की इच्छा करना ही दुख का कारण है: जीयर स्वामी

सुख की इच्छा करना ही दुख का कारण है: जीयर स्वामी

- बरजा में आयोजित ज्ञानयज्ञ में जीयर स्वामी जी महाराज ने दु:ख के कारणों पर डाला प्रकाश

केटी न्यूज/आरा

बरजा में प्रवचन करते हुए शनिवार को श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि अपने लिए सुख की इच्छा करना ही दु:ख का कारण है। जितना ही हम सुख सुविधा में रहना चाहेंगे, उतना ही संसार में परेशानियां पैदा होगी और उतना ही कष्ट होगा। इसलिए सुख पाने के लिए अपने सुख की इच्छा का त्याग करना चाहिए। सुख की इच्छा आशा और भोग तीनों संपूर्ण दुखों के कारण हैं। ऐसा होना चाहिए, ऐसा नहीं होना चाहिए इसी में सब दु:ख भरे हुए हैं। मन में किसी वस्तु की चाह रखना ही दरिद्रता है। लेने की इच्छा वाला सदा दरिद्र ही रहता है। मनुष्य को कर्मों का त्याग नहीं करना है प्रतीत कामना का त्याग करना है।

सुख की इच्छा करना ही दुख का कारण है: जीयर स्वामी

मनुष्य को वस्तु गुलाम नहीं बनाती, उसको इच्छा गुलाम बनाती है। यदि शांति चाहते हो तो कामना का त्याग करो। कुछ भी लेने की इच्छा भयंकर दुख देने वाली है। जिसके भीतर इच्छा है उसको  किसी न किसी के पराधीन होना ही पड़ेगा। अपने लिए सुख चाहना राक्षसी वृति है। संग्रह की इच्छा पाप करने के सिवाय और कुछ नहीं कराती।अतः इस इच्छा का त्याग कर देना चाहिए। कामना का त्याग कर दें तो आवश्यक बस्तुएं स्वतः प्राप्त होंगी।क्योंकि निष्काम पुरुष के पास आने के लिए बस्तुएं लालायित रहती है। जो अपने सुख के लिए वस्तुओं की इच्छा करता है, उसको वस्तुओं के अभाव का दुख भोगना ही पड़ेगा।

विपत्ति को विपत्ति नहीं, संपत्ति को संपत्ति नहीं समझना चाहिए। हमारे पास जो विपत्ति आता है तो महापुरूष लोग यह मानते हैं कि जो मैने किया था उसका मार्जन हो गया। ऐश्वर्य इत्यादि आया तो यह मानते हैं कि सुकृत कर्म कम हो गया ऐसा मानते हैं। सबसे बडा विपत्ति वह है जिसमें हम परमात्मा को भूल जाएं। उनकी संस्कृति, संदेश को भूल जाएं। जिस विपत्ति में हमारे घर में,परिवार में रहन-सहन, उठन-बैठन, बोल चाल, खान पान, सब जहां बिगड़ जाए तो समझना चाहिए सबसे बड़ा विपत्ति यहीं है। यह विपत्ति का समाधान एक मात्र विनाश है। सर्वनाश के अलावा कोई दूसरा उपाय नही है। जहां भगवान नारायण की स्मृति हो जाय। घर परिवार की स्थिति थोड़ी दयनीय हो जाए। जिसने संकल्प ले लिया कि चोरी, बेईमानी, अनीति, अन्याय, कुकर्म, अधर्म नहीं करूंगा सबसे बड़ा श्रेष्ठ कर्म वह है। एक दिन वह परिवार ऊंचाई पर चढ़ेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में बड़कन तिवारी मोहन तिवारी  जितेंद्र तिवारी द्वारिका तिवारी शिवकुमार तिवारी आदि लगे हुए हैं।

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