नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई, अब पर्यावरण बचाने की चुनौती

चार दिवसीय दशहरा मेला बड़े उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। मेले के समापन के साथ ही भक्तों ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी। खोइछा बांधने की परंपरा निभाते हुए महिलाओं और श्रद्धालुओं ने मां से सुख-समृद्धि की कामना की।

नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई, अब पर्यावरण बचाने की चुनौती

__ डुमरांव में चार दिवसीय दशहरा मेला उत्साह के साथ संपन्न, कृत्रिम तालाबों में ही प्रतिमा विसर्जन कराने की उठी मांग

केटी न्यूज/डुमरांव।

चार दिवसीय दशहरा मेला बड़े उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। मेले के समापन के साथ ही भक्तों ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी। खोइछा बांधने की परंपरा निभाते हुए महिलाओं और श्रद्धालुओं ने मां से सुख-समृद्धि की कामना की। विदाई के इस भावुक माहौल के बीच अब प्रतिमा विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने का मुद्दा भी चर्चा में है। सामाजिक मंच के संयोजक और डुमरांव विधानसभा क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी प्रदीप कुमार शरण ने जिला प्रशासन से कृत्रिम तालाबों में ही प्रतिमा विसर्जन सुनिश्चित कराने की मांग की है।उन्होंने बक्सर के जिलाधिकारी से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के दिशा-निर्देशों का जिले में सख्ती से पालन कराने की अपील की है। शरण ने कहा कि आस्था के इस बड़े पर्व के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके लिए विसर्जन से पहले पर्याप्त व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

__ प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने पर जोर

प्रदीप कुमार शरण ने कहा कि दुर्गा पूजा की प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित कृत्रिम तालाबों में ही कराया जाना चाहिए। नदियों, पोखरों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में प्रतिमाओं के विसर्जन से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा होता है। ऐसे में पर्यावरणीय निर्देशों का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जरूरी जिम्मेदारी है।उन्होंने चिंता जताई कि बक्सर जिले में पंचायत से लेकर जिला स्तर तक कृत्रिम तालाबों के निर्माण और उनकी उपलब्धता को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नजर नहीं आ रही है। पूर्व के अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बीते वर्षों में डुमरांव के ऐतिहासिक छठिया पोखरा में प्रतिमा विसर्जन की स्थिति बनी थी। इससे पोखरे के पानी के प्रदूषित होने की आशंका बढ़ गई थी।

__ प्रतिमाओं की संख्या के अनुरूप बने कृत्रिम तालाब

शरण ने नगर विकास एवं आवास विभाग और संबंधित निकायों के माध्यम से पर्याप्त संख्या में कृत्रिम तालाबों के निर्माण के लिए प्राक्कलन तैयार कर त्वरित कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसलिए प्रतिमाओं की संख्या और विसर्जन की जरूरत को ध्यान में रखकर तालाबों की व्यवस्था की जानी चाहिए।

__ पूजा समितियों को पहले ही मिले लिखित निर्देश

उन्होंने जिला प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि विसर्जन स्थलों की पहचान और कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था पूरी होने के बाद सभी दुर्गा पूजा समितियों को समय रहते लिखित सूचना दी जाए। इससे विसर्जन के दिन भ्रम, असुविधा और अव्यवस्था से बचा जा सकेगा।प्रदीप कुमार शरण ने कहा कि मां दुर्गा को श्रद्धापूर्वक विदाई देने के साथ प्रकृति की रक्षा करना भी समाज का दायित्व है। प्रशासन, पूजा समितियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही स्वच्छ विसर्जन की परंपरा मजबूत होगी। आस्था का सम्मान और पर्यावरण का संरक्षण साथ-साथ चले, तभी स्वच्छ बक्सर और सुरक्षित जल स्रोतों का संकल्प साकार हो सकेगा।