छह बार गोल्ड जीतकर साक्षी ने रचा इतिहास, अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप पर नजर
खेल के मैदान में कामयाबी की नई इबारत लिख रही डुमरांव की बेटी साक्षी ने अपनी उपलब्धियों से बक्सर जिले का मान बढ़ाया है। बिहार स्टेट सीनियर जूडो चैंपियनशिप में लगातार छठी बार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर सफलता की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।

__ जूडो के दांव-पेच में डुमरांव की बेटी का जलवा, पदकों से सजा सफर; नवोदय विद्यालय की छात्राओं को आत्मरक्षा का भी दे रहीं प्रशिक्षण
केटी न्यूज/डुमरांव।
खेल के मैदान में कामयाबी की नई इबारत लिख रही डुमरांव की बेटी साक्षी ने अपनी उपलब्धियों से बक्सर जिले का मान बढ़ाया है। बिहार स्टेट सीनियर जूडो चैंपियनशिप में लगातार छठी बार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर सफलता की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। साक्षी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि वह अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ दूसरी छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर उन्हें आत्मविश्वासी बनाने में भी जुटी हैं।

पटना के मान्या रिजॉर्ट में 17 और 18 अक्टूबर को आयोजित बिहार स्टेट सीनियर जूडो चैंपियनशिप में साक्षी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी जीत की खबर मिलते ही परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बुधवार को घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। बेटी की इस शानदार सफलता से गदगद पिता संतोष कुमार और मां रेखा प्रसाद ने मिठाई खिलाकर उसका स्वागत किया।

__ 2021 से जारी है पदक जीतने का सिलसिला
साक्षी का जूडो सफर वर्ष 2021 से लगातार उपलब्धियों का गवाह रहा है। इस दौरान उन्होंने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। राज्य स्तरीय सीनियर प्रतियोगिता में लगातार छह बार गोल्ड मेडल हासिल करना उनकी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है। अब उनकी निगाहें राष्ट्रीय चैंपियनशिप पर टिकी हैं, जहां वह बेहतर प्रदर्शन कर देश के लिए पदक जीतने का सपना साकार करना चाहती हैं।साक्षी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और भाई के सहयोग को देती हैं। उनके पिता संतोष कुमार व्यवसायी हैं, जबकि मां रेखा प्रसाद अपना ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। परिवार के प्रोत्साहन ने साक्षी को खेल के प्रति समर्पित रहने और चुनौतियों का सामना करने की ताकत दी है।

__ पढ़ाई, खेल और आत्मरक्षा का अनूठा संगम
साक्षी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की है। फिलहाल वह जालंधर में बीपीएड की तैयारी कर रही हैं। शिक्षा और खेल के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने वाली साक्षी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। वह नावानगर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में महीने में दो दिन छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देती हैं। उनके इस प्रयास से छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और मुश्किल परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने में मदद मिल रही है।

उनके भाई आनंद राज भी दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं और बहन की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। लगातार छह बार राज्य चैंपियन बनने वाली साक्षी आज उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं, जो खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। उनकी सफलता का संदेश साफ है—लक्ष्य के प्रति समर्पण और परिवार का साथ मिले, तो छोटे शहरों से निकलकर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

