हनुमान जी के पराक्रम से जली सोने की लंका, राधा-कृष्ण की सगाई ने मोहा मन
ऐतिहासिक किला मैदान में आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के चौदहवें दिन शनिवार को भक्ति, आस्था और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में दिन के समय कृष्णलीला के अंतर्गत ‘श्याम सगाई’ और देर रात रामलीला में ‘लंका दहन’ के प्रसंग का भव्य मंचन किया गया।

__ विजयादशमी महोत्सव के चौदहवें दिन रामलीला में ‘लंका दहन’ और कृष्णलीला में ‘श्याम सगाई’ का हुआ भव्य मंचन, जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजा किला मैदान
केटी न्यूज/बक्सर।
ऐतिहासिक किला मैदान में आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के चौदहवें दिन शनिवार को भक्ति, आस्था और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में दिन के समय कृष्णलीला के अंतर्गत ‘श्याम सगाई’ और देर रात रामलीला में ‘लंका दहन’ के प्रसंग का भव्य मंचन किया गया। श्रीधाम वृंदावन से आए सुप्रसिद्ध श्री बाल कृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में दोनों प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मंच पर कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय और आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूरा पंडाल जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से गूंजता रहा।

__ हनुमान जी के शौर्य से कांपी लंका, अग्नि में भस्म हुई स्वर्णनगरी
देर रात रामलीला में ‘लंका दहन’ का रोमांचक प्रसंग मंचित हुआ। कथा के अनुसार, सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य मिलने के बाद श्रीराम से किया गया वादा भूल जाने पर लक्ष्मण जी के क्रोधित होने और फिर माता सीता की खोज में वानर सेना के निकलने का दृश्य दिखाया गया। समुद्र तट पर पहुंचने के बाद जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी अपार शक्ति का स्मरण कराया, जिसके बाद वे समुद्र लांघकर लंका पहुंचते हैं।लंका में विभीषण से भेंट के बाद हनुमान जी अशोक वाटिका में माता सीता तक पहुंचते हैं और उन्हें प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देकर उनके शीघ्र आगमन का भरोसा दिलाते हैं। इसके बाद वाटिका उजाड़ने और रावण के योद्धाओं से संघर्ष का दृश्य दिखाया गया।

हनुमान जी द्वारा अक्षय कुमार के वध और मेघनाद के ब्रह्मास्त्र से उन्हें बंदी बनाए जाने के प्रसंग ने दर्शकों में उत्सुकता बढ़ा दी।रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई जाती है, लेकिन बजरंगबली उसी अग्नि से स्वर्णनगरी लंका को जलाकर राख कर देते हैं। विभीषण के भवन को सुरक्षित रखते हुए वे समुद्र में अपनी पूंछ की आग बुझाते हैं और माता सीता से विदा लेकर श्रीराम के पास लौटने की तैयारी करते हैं। इस दृश्य के साथ ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

__ राधा-कृष्ण की सगाई के प्रसंग ने बांधा समां
दिन में कृष्णलीला के दौरान ‘श्याम सगाई’ का मनोहारी मंचन हुआ। प्रसंग में श्रीकृष्ण और राधारानी की पहली मुलाकात, परिचय तथा साथ में गेंद खेलने के दृश्यों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राधारानी सखियों के साथ नंदगांव पहुंचती हैं, जहां श्रीकृष्ण उन्हें माता यशोदा से मिलवाते हैं। राधारानी का परिचय जानकर मैया यशोदा प्रसन्न होती हैं और स्नेहपूर्वक उनका श्रृंगार कर गोद भराई की रस्म निभाती हैं। इसी के साथ राधा-कृष्ण की सगाई का प्रसंग पूर्ण होता है। इस दृश्य ने दर्शकों का मन मोह लिया और पंडाल जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से गूंज उठा।महोत्सव के दौरान आयोजन समिति के पदाधिकारी बैकुण्ठनाथ शर्मा, हरिशंकर गुप्ता, सुरेश संगम, कृष्णा वर्मा, उदय सर्राफ, जोखन जी, चिरंजीलाल चौधरी और नारायण राय सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

