भक्ति, ज्ञान और सामूहिक चेतना का संगम बना भागवत कथा का सातवां दिन
डुमरांव के जंगल बाजार रोड स्थित बड़ी संगत उदासीन मठिया परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन बुधवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर किया, बल्कि आध्यात्मिक शांति और सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूर्णाहुति कराई गई, जिसके साथ कथा का समापन हुआ।
-- पूर्णाहुति और भंडारे के साथ बड़ी संगत उदासीन मठिया में संपन्न हुआ सात दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव के जंगल बाजार रोड स्थित बड़ी संगत उदासीन मठिया परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन बुधवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर किया, बल्कि आध्यात्मिक शांति और सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूर्णाहुति कराई गई, जिसके साथ कथा का समापन हुआ।समापन अवसर पर आयोजित भव्य भंडारे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पंक्तिबद्ध होकर लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की भव्यता को सराहा। पूरे मठिया परिसर में कीर्तन, भजन और जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम के समापन समारोह का संचालन आयोजन समिति के अध्यक्ष विकास ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि यह कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने का माध्यम बनी।कथावाचक मानस माधुरी पाठक ने अपने प्रवचन में श्रीमद् भागवत कथा के सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण और भौतिकतावादी युग में श्रीमद् भागवत मानव जीवन को संतुलन प्रदान करती है। यह ग्रंथ व्यक्ति को सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में आत्मिक शांति प्राप्त करने का सबसे सहज और प्रभावी मार्ग श्रीमद् भागवत का श्रवण, मनन और चिंतन है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, ध्रुव की तपस्या और राजा परीक्षित के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इन कथाओं ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और जीवन में धैर्य, करुणा और सेवा के महत्व को रेखांकित किया। सात दिनों तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और भक्ति व ज्ञान का लाभ लिया।आयोजन समिति ने कथा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साधु-संतों, समाजसेवियों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक चेतना के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को भी मजबूती प्रदान की, जिससे यह कथा लंबे समय तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में बनी रहेगी।

