अयोध्या सा सजा ठोरी पांडेयपुर, रामलला की बाल लीलाओं से गूंजा गांव
ठोरी पांडेयपुर गांव इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। गौरीशंकर, राधेकृष्ण मंदिर पश्चिम पोखरा परिसर में चल रही पांच दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन गुरुवार को ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा गांव अयोध्या में परिवर्तित हो गया हो। श्रीराम जन्म और उनकी मनोहारी बाल लीलाओं के प्रसंग ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति की ऐसी अलख जगाई कि देर शाम तक कथा स्थल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंजता रहा।
-- पांच दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन उमड़ी आस्था की भीड़, भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
केटी न्यूज/चौगाईं
ठोरी पांडेयपुर गांव इन दिनों भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। गौरीशंकर, राधेकृष्ण मंदिर पश्चिम पोखरा परिसर में चल रही पांच दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन गुरुवार को ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा गांव अयोध्या में परिवर्तित हो गया हो। श्रीराम जन्म और उनकी मनोहारी बाल लीलाओं के प्रसंग ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति की ऐसी अलख जगाई कि देर शाम तक कथा स्थल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंजता रहा।राष्ट्रीय कथावाचक पंडित मधुसूदन बिहारी जी ने जब भगवान श्रीराम के अवतरण का प्रसंग सुनाया तो वातावरण भावविभोर हो उठा। उन्होंने अपने ओजस्वी और मधुर वाचन में बताया कि त्रेता युग में जब अयोध्या नगरी में रामलला ने जन्म लिया, तब सम्पूर्ण सृष्टि आनंद से भर उठी थी।

देवताओं ने पुष्पवर्षा की, गंधर्वों ने मंगलगान किया और अयोध्या वासियों ने दीप प्रज्वलित कर उत्सव मनाया। कथावाचक के भावपूर्ण वर्णन से श्रोताओं को ऐसा अनुभव हुआ मानो वे स्वयं उस दिव्य क्षण के साक्षी हों।कथा का मुख्य आकर्षण श्रीराम की बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन रहा। पंडित जी ने रामलला के चंचल और मनोहारी बाल स्वरूप, माता कौशल्या के वात्सल्य और स्नेह, तथा गुरु वशिष्ठ के आश्रम में प्राप्त संस्कारों का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक अवतार नहीं, बल्कि आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। बाल्यकाल से ही उनमें आज्ञाकारिता, मर्यादा, संयम और करुणा के गुण विद्यमान थे, जो हर युग के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

कथावाचन के दौरान संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धा का वातावरण और भी सघन बना दिया। भजन और मंगल गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। महिलाएं मंगलगान करती रहीं तो युवा वर्ग भी पूरे उत्साह से कथा श्रवण में लीन दिखा।कई श्रद्धालुओं की आंखें भावुक होकर नम हो गईं।आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास है। उनका कहना है कि आज के दौर में श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करना ही सच्ची भक्ति है। कथा स्थल की सजावट, प्रकाश व्यवस्था और भक्तों की सेवा व्यवस्था भी आकर्षण का केंद्र बनी रही।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि वर्षों बाद ऐसा आध्यात्मिक आयोजन देखने को मिला है, जिसने पूरे क्षेत्र को एक सूत्र में बांध दिया है। कथा के आगामी दिनों में और भी रोचक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से पहुंचकर रामकथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।

