श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव के पहले दिन उमड़ा आस्था का सागर

श्री हनुमत धाम मंदिर, कमरपुर का पावन प्रांगण शनिवार को भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर नजर आया, जब पूज्य श्री श्री 108 श्री अनंत श्री संपन्न श्री समलंकृत सियानुज श्री नारायण दास ‘भक्तमाली’ महाराज (मामा जी महाराज) के 18वें पुण्य स्मृति महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव के पहले दिन उमड़ा आस्था का सागर

-- हनुमत धाम मंदिर में गूंजा गुरु महिमा का जयघोष, कथा और भजन से भक्तिमय हुआ वातावरण

केटी न्यूज/बक्सर

श्री हनुमत धाम मंदिर, कमरपुर का पावन प्रांगण शनिवार को भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर नजर आया, जब पूज्य श्री श्री 108 श्री अनंत श्री संपन्न श्री समलंकृत सियानुज श्री नारायण दास ‘भक्तमाली’ महाराज (मामा जी महाराज) के 18वें पुण्य स्मृति महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

-- कथा व्यास ने बताया गुरु भक्ति का महत्व

अयोध्या धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित विजय नारायण शरण जी ने पहले दिन की कथा का शुभारंभ करते हुए श्रीराम कथा की दिव्य महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने अपने ओजस्वी वचनों में पूज्य मामा जी महाराज एवं श्री महात्मा जी (श्री रामचरित्र दास जी महाराज) के त्यागमय जीवन, साधना और गुरु-शिष्य परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला।कथा व्यास ने कहा कि “गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाले प्रकाश स्तंभ होते हैं। गुरु की कृपा से ही मानव जीवन सार्थक होता है।

-- हनुमान चालीसा पाठ से गूंजा मंदिर परिसर

महोत्सव के पहले दिन सामूहिक हनुमान चालीसा के सस्वर अखंड पाठ का आयोजन किया गया। जैसे ही श्रद्धालुओं ने एक स्वर में ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष लगाए, पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा। भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच श्रद्धालु भावविभोर होकर गुरु चरणों में नतमस्तक होते दिखे।

-- 4 फरवरी तक चलेगा पुण्य स्मृति महोत्सव

आयोजन समिति श्री नेहनिधि नारायण सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि यह पुण्य स्मृति महोत्सव आगामी 4 फरवरी तक निरंतर चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन प्रवचन, भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।महोत्सव को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और समिति के सभी सदस्य पूरे उत्साह और समर्पण के साथ जुटे हुए हैं।प्रथम दिन की भव्यता और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि गुरु भक्ति की यह परंपरा आने वाले दिनों में और भी विराट रूप लेगी।