40 साल का इंतजार खत्म होने की उम्मीद, सांसद ने मलई बराज का किया निरीक्षण, हजारों किसानों की बदलेगी तकदीर

दशकों से फाइलों, प्रशासनिक अड़चनों और तकनीकी खामियों में उलझी मलई बराज परियोजना अब आखिरकार धरातल पर साकार होने के करीब पहुंच गई है। बक्सर, भोजपुर और रोहतास जिले के किसानों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जिला प्रशासन ने प्राथमिकता सूची में शामिल किया है। यदि कार्य तय योजना के अनुसार आगे बढ़ा, तो अक्टूबर 2027 से पहले क्षेत्र के हजारों हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा।इसी कड़ी में शनिवार को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने निर्माणाधीन मलई बराज का स्थल निरीक्षण कर कार्य प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान सांसद ने संबंधित कनीय अभियंता और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्य में तेजी लाई जाए और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।

40 साल का इंतजार खत्म होने की उम्मीद, सांसद ने मलई बराज का किया निरीक्षण, हजारों किसानों की बदलेगी तकदीर

केटी न्यूज/केसठ/नावानगर। 

दशकों से फाइलों, प्रशासनिक अड़चनों और तकनीकी खामियों में उलझी मलई बराज परियोजना अब आखिरकार धरातल पर साकार होने के करीब पहुंच गई है। बक्सर, भोजपुर और रोहतास जिले के किसानों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जिला प्रशासन ने प्राथमिकता सूची में शामिल किया है। यदि कार्य तय योजना के अनुसार आगे बढ़ा, तो अक्टूबर 2027 से पहले क्षेत्र के हजारों हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा।इसी कड़ी में शनिवार को बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने निर्माणाधीन मलई बराज का स्थल निरीक्षण कर कार्य प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान सांसद ने संबंधित कनीय अभियंता और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्य में तेजी लाई जाए और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।

उन्होंने कहा कि मलई बराज क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद अहम परियोजना है और इसका लाभ जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचना चाहिए।मलई बराज का निर्माण काव नदी पर नावानगर प्रखंड के रूपसागर गांव के समीप किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 204.96 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। परियोजना के पूर्ण होने पर करीब 8,630 हेक्टेयर, यानी लगभग 21 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। इससे बक्सर जिले के नावानगर, केसठ, चौगाईं, डुमरांव और ब्रह्मपुर प्रखंड के अलावा भोजपुर जिले के शाहपुर और बिहीया प्रखंड के किसानों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।उन्होंने बताया कि मलई बराज का निर्माण आधुनिक तकनीक के तहत किया जा रहा है।

पंप प्रणाली के माध्यम से बराज में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे कम जलस्तर की स्थिति में भी नहरों तक पानी पहुंचाया जा सकेगा। परियोजना के तहत बराज में अधिकतम 704 क्यूसेक प्रति सेकेंड पानी संग्रह करने की क्षमता होगी। इसमें से 110 क्यूसेक पानी केसठ नहर और 90 क्यूसेक पानी भोजपुर नहर के लिए निर्धारित किया गया है। बराज निर्माण के लिए अब तक करीब 35 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, जबकि लगभग 58 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।मलई बराज परियोजना का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। इसकी आधारशिला वर्ष 1982 में रखी गई थी, लेकिन पिछले 40 वर्षों में यह परियोजना कई बार शुरू होकर बंद होती रही।

वर्ष 2011-12 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर इसे पुनर्जीवित किया गया, लेकिन 2017-18 में तकनीकी खामी के कारण बराज का मुख्य पाया धंस जाने से कार्य फिर ठप हो गया। अब नए सिरे से डिजाइन और टेंडर प्रक्रिया के साथ इसे पूरा करने की तैयारी चल रही है।निरीक्षण के दौरान राजद के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार यादव उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि इस परियोजना को लेकर वर्षों से संघर्ष किया गया है और अब किसानों को इस संघर्ष का फल मिलने का समय करीब आ गया है। निरीक्षण में केसठ पंचायत मुखिया अरविंद कुमार यादव उर्फ गामा पहलवान, जितेंद्र पहलवान, मुख्तार यादव, रूपसागर मुखिया सहित कई जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मौजूद रहे। वर्षों बाद मलई बराज को लेकर किसानों में नई उम्मीद जगी है।