Monday, 2 November 2026
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स्टेशन रोड के मरम्मत की सुस्ती पर फूटा गुस्सा, समाजवादी विचार मंच ने निकाला आक्रोश मार्च

डुमरांव अनुमंडल के पुराना भोजपुर से मां डुमरेजनी प्रवेश द्वार तक प्रस्तावित सड़क निर्माण अब सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और ठेकेदारी तंत्र की बदहाली का प्रतीक बन चुकी है। करीब पांच किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण कार्य चार महीने से ठप पड़ा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात से त्रस्त होकर शनिवार को समाजवादी विचार मंच के बैनर तले लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा और आक्रोश मार्च निकाला गया।

स्टेशन रोड के मरम्मत की सुस्ती पर फूटा गुस्सा, समाजवादी विचार मंच ने निकाला आक्रोश मार्च

 -- पांच किलोमीटर की सड़क, चार महीने की ठप, डुमरांव में सड़क नहीं, सिस्टम की नाकामी बनी जनता की सजा

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव अनुमंडल के पुराना भोजपुर से मां डुमरेजनी प्रवेश द्वार तक प्रस्तावित सड़क निर्माण अब सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और ठेकेदारी तंत्र की बदहाली का प्रतीक बन चुकी है। करीब पांच किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण कार्य चार महीने से ठप पड़ा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात से त्रस्त होकर शनिवार को समाजवादी विचार मंच के बैनर तले लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा और आक्रोश मार्च निकाला गया।मार्च के बाद कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर सड़क निर्माण में अनियमितता, लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी प्रदीप शरण ने की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सड़क निर्माण के लिए करीब 1 करोड़ 38 लाख रुपये की राशि स्वीकृत है और सितंबर में कार्य शुरू भी हो चुका था, तो फिर महीनों बाद भी सड़क जस की तस क्यों है।स्थानीय लोगों का कहना है कि दो बार ट्रैफिक डायवर्ट कर मुख्य सड़क को बंद कर दिया गया, लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। नतीजा यह हुआ कि जगह-जगह गड्ढे, उड़ती धूल और कीचड़ ने इस मार्ग को जानलेवा बना दिया है। स्कूली बच्चे रोज गिरते-पड़ते स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं, मरीजों को अस्पताल ले जाना जोखिम भरा हो गया है और बुजुर्गों के लिए सड़क पार करना किसी परीक्षा से कम नहीं।

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सड़क किनारे बसे दुकानदारों और व्यापारियों की स्थिति भी बदतर है। ग्राहक आना बंद हो गए हैं और रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि संवेदक और संबंधित विभाग की मिलीभगत से काम जानबूझकर लटकाया जा रहा है।समाजवादी विचार मंच ने स्पष्ट मांग की कि लापरवाही बरतने वाले संवेदक पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए, उसे काली सूची में डाला जाए और सड़क निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए। मंच ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा।आक्रोश मार्च में संतोष मुखिया, नागेंद्र मोहन सिंह, संदीप राय, दिनेश यादव, हरेकृष्ण सिंह, अजय सिंह, हरेंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता शामिल रहे।

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