आस्था, उल्लास और लोकगीतों से गूंजा रघुनाथपुर

ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम परिसर में अवस्थित महाकालेश्वर मंदिर इन दिनों भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आ रहा है। महाशिवरात्रि से पूर्व आयोजित महाकाल भगवान की हल्दी एवं मटकोड़ रस्म ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर कर दिया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पंडित राजू मिश्रा ने पारंपरिक विधि-विधान से भगवान महाकाल की हल्दी चढ़ाई। जैसे ही हल्दी की रस्म आरंभ हुई, मंदिर प्रांगण में मौजूद महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीतों की स्वर लहरियां बिखेर दीं।

आस्था, उल्लास और लोकगीतों से गूंजा रघुनाथपुर

-- महाकालेश्वर मंदिर में हल्दी-मटकोड़ की रस्म के साथ शिव विवाह उत्सव की भव्य शुरुआत

केटी न्यूज/ब्रह्मपुर

ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम परिसर में अवस्थित महाकालेश्वर मंदिर इन दिनों भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आ रहा है। महाशिवरात्रि से पूर्व आयोजित महाकाल भगवान की हल्दी एवं मटकोड़ रस्म ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर कर दिया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पंडित राजू मिश्रा ने पारंपरिक विधि-विधान से भगवान महाकाल की हल्दी चढ़ाई। जैसे ही हल्दी की रस्म आरंभ हुई, मंदिर प्रांगण में मौजूद महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीतों की स्वर लहरियां बिखेर दीं। “कौना बने रहलू ए कोयलर३” जैसे लोकगीतों ने माहौल को जीवंत बना दिया। गौरा-हिमाचल प्रसंग से जुड़े गीतों के साथ श्रद्धालु झूम उठे।

पूजा समिति के सदस्य मदन चौधरी, शैलेश ओझा, संतोष सिंह और संतोष गुप्ता सहित अन्य श्रद्धालुओं ने नेग की परंपरा निभाते हुए उत्सव में सक्रिय भागीदारी की। मंदिर परिसर रंग-बिरंगी सजावट, फूलों और दीपों से सुसज्जित रहा, जिससे पूरा वातावरण विवाहोत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था।आगामी महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां से महाकाल की भव्य शिव बारात निकलेगी। यह बारात रघुनाथपुर स्टेशन के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर तक पहुंचेगी, जहां हिमाचल की पुत्री माता गौरा संग भगवान शिव का विवाह वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न कराया जाएगा।

इस दौरान गंगा महाआरती और महाकाल की विशेष भस्म आरती भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।श्रद्धालुओं में इस अनूठे आयोजन को लेकर विशेष उत्साह है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उत्सव है।महाकालेश्वर मंदिर में आरंभ हुआ यह विवाहोत्सव अब पूरे क्षेत्र में आस्था का उत्सव बन चुका है, जिसका चरम दृश्य महाशिवरात्रि की रात देखने को मिलेगा।