रामकथा की गूंज से गूंज उठा कमरपुर

कमरपुर स्थित श्री हनुमत धाम मंदिर इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है। श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव के चौथे दिन जैसे ही रामकथा का प्रवाह शुरू हुआ, पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और ग्रामीण भक्त एक साथ प्रभु श्रीराम की कथा में डूबते चले गए।

रामकथा की गूंज से गूंज उठा कमरपुर

--अहिल्या उद्धार प्रसंग पर उमड़ा आस्था का सागर, संत-महात्माओं की उपस्थिति ने रचा इतिहास

केटी न्यूज/बक्सर

कमरपुर स्थित श्री हनुमत धाम मंदिर इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है। श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव के चौथे दिन जैसे ही रामकथा का प्रवाह शुरू हुआ, पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और ग्रामीण भक्त एक साथ प्रभु श्रीराम की कथा में डूबते चले गए।

--राम के चरण स्पर्श से चेतना में लौटी अहिल्या

चौथे दिन की कथा में अयोध्या से पधारे प्रख्यात कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण जी ने अहिल्या उद्धार प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या श्रापवश शिला बन गई थीं, लेकिन प्रभु श्रीराम के चरणों की रज मात्र से उनका उद्धार हो गया।व्यास जी ने कहा कि श्रीराम केवल मर्यादा पुरुषोत्तम ही नहीं, बल्कि करुणा और कृपा के जीवंत स्वरूप हैं। उनका स्पर्श केवल शरीर को नहीं, बल्कि आत्मा को भी जागृत करता है। कथा के इस प्रसंग पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

--जनकपुर नगर दर्शन ने बांधा समां

कथा के अगले क्रम में प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर नगर भ्रमण का वर्णन किया गया। जैसे ही व्यास जी ने जनकपुर की अलौकिक छटा और वहां के लोगों की भावनाओं को शब्दों में उकेरा, श्रोता उस दृश्य को मन ही मन देखने लगे। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु झूम उठे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

--साधु-संतों की उपस्थिति ने दिया महाकुंभ सा स्वरूप

चौथे दिन के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही हजारों साधु-संतों की गरिमामयी मौजूदगी। बक्सर सहित आसपास के जिलों से पहुंचे संत-महात्माओं ने पूज्य मामा जी महाराज एवं श्री महात्मा जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संतों के सान्निध्य ने पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक महाकुंभ का स्वरूप दे दिया।

--आज होगा महोत्सव का समापन, विशाल भंडारे का आयोजन

आयोजन समिति के अनुसार, 4 फरवरी (बुधवार) को महोत्सव का अंतिम दिन होगा। दोपहर 1 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करने और धर्मलाभ लेने की अपील की है।कमरपुर इन दिनों केवल एक गांव नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का जीवंत तीर्थ बन चुका है।