महाशिवरात्रि पर ढकाइच में आस्था का महोत्सव, 300 साल पुराने शिवालय में लगेगी 10 फीट ऊंची प्रतिमा

सिमरी प्रखंड के ढकाइच गांव में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। करीब 300 वर्ष पुराने आदिदेव शिव मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ की 10 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है और हर वर्ग के लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं।

महाशिवरात्रि पर ढकाइच में आस्था का महोत्सव, 300 साल पुराने शिवालय में लगेगी 10 फीट ऊंची प्रतिमा

केटी न्यूज/डुमरांव

सिमरी प्रखंड के ढकाइच गांव में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। करीब 300 वर्ष पुराने आदिदेव शिव मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ की 10 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है और हर वर्ग के लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं।ग्रामीणों के अनुसार ढकाइच स्थित आदिदेव शिव मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि गांव के अस्तित्व और विश्वास से जुड़ा केंद्र रहा है।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि गंगा की प्रचंड धारा से जब गांव पर डूबने का खतरा मंडरा रहा था, तब बनारस से लाए गए शिवलिंग की स्थापना के बाद हालात बदले और गांव सुरक्षित रहा। इसके बाद विधिवत मंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने मिलकर योगदान दिया। तभी से यह शिवालय गांव की आस्था और एकता का प्रतीक बन गया।अब इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भगवान भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा को कोलकाता से मंगाया गया है। प्रतिमा की कलात्मक बनावट और दिव्यता को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

महाशिवरात्रि के दिन वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा, हवन और अनुष्ठान के साथ प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का भी प्रबंध किया गया है, जिसमें आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु शामिल होंगे। संत-महात्माओं और गणमान्य लोगों की उपस्थिति से कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ेगी।ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गांव के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। श्रमदान और सहयोग से साकार हो रहा यह सपना ढकाइच गांव की सामूहिक शक्ति और अटूट आस्था को दर्शाता है।