जनता दरबार में जमीन विवादों की भरमार, भूमि सर्वे के बावजूद कागजात सुधार पर उठे सवाल
प्रखंड अंचल कार्यालय में आयोजित जनता दरबार एक बार फिर यह साबित कर गया कि ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े विवाद प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अंचल कर्मियों की मौजूदगी में धनसोई थानाध्यक्ष विकास कुमार और राजपुर एसआई प्रमोद कुमार ने लोगों की फरियाद सुनी, लेकिन अधिकांश मामलों में जमीन संबंधी उलझनें ही छाई रहीं।
केटी न्यूज/राजपुर
प्रखंड अंचल कार्यालय में आयोजित जनता दरबार एक बार फिर यह साबित कर गया कि ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े विवाद प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अंचल कर्मियों की मौजूदगी में धनसोई थानाध्यक्ष विकास कुमार और राजपुर एसआई प्रमोद कुमार ने लोगों की फरियाद सुनी, लेकिन अधिकांश मामलों में जमीन संबंधी उलझनें ही छाई रहीं।

जनता दरबार में सबसे अधिक चर्चा दुल्फा पंचायत के इटाढ़िया मौजा अंतर्गत मोहनी टोला की रही, जहां रामकिशोर सिंह और शिवधारी सिंह के बीच गलत तरीके से जमीन की रजिस्ट्री का आरोप लगाया गया। कागजातों की जांच के बाद प्रशासन ने निबंधन कार्यालय में आवेदन करने की सलाह देकर मामला आगे बढ़ा दिया। वहीं रोहतास जिले के कमहरिया गांव निवासी राम नगीना राम और सिसौंधा गांव के श्रवण पासवान के बीच दाखिल-खारिज का मामला सामने आया, जिसे वरीय पदाधिकारी के पास भेजने का सुझाव दिया गया।

राजपुर थाना क्षेत्र के अकबरपुर पंचायत के जलहरा गांव में अरविंद कुमार राय और शैलेंद्र उर्फ झब्बू राय का विवाद पहले से न्यायालय में लंबित है, बावजूद इसके एक पक्ष द्वारा मकान निर्माण की तैयारी किए जाने पर प्रशासन ने तत्काल कार्य रोकने की हिदायत दी। ननौरा गांव के अमरनाथ राय और श्रीकांत राय के बीच जमाबंदी रद्द कराने का मामला भी न्यायालय के पाले में डाल दिया गया।

करीब एक दर्जन से अधिक जमीन विवादों ने जनता दरबार की तस्वीर साफ कर दी। देवढिया, मंगराव, खीरी, हेठुआ, नागपुर, उत्तमपुर, रघुनाथपुर, राजपुर सहित कई गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने खुलकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि सरकार भूमि सर्वेक्षण का दावा कर रही है, लेकिन वर्षों पुराने कागजात आज भी जस के तस हैं। कई लोगों ने 20 साल पहले जमीन खरीदी, पर आज तक दाखिल-खारिज नहीं हो सका।

प्रशासन ने समाधान के तौर पर वरीय अधिकारियों के पास आवेदन की सलाह दी, लेकिन सवाल यही है कि जब जनता दरबार में भी जमीन के मामलों का स्थायी हल नहीं निकल पा रहा, तो आम ग्रामीण आखिर न्याय के लिए कहां जाए।
