पंचायत से न्याय तक: ‘मेडिएशन फॉर नेशन-2’ के जरिए गांवों में पहुंचा संवाद से समाधान का मंत्र

न्याय की राह को आसान और मानवीय बनाने के उद्देश्य से ‘मेडिएशन फॉर नेशन-2’ कार्यक्रम के तहत बक्सर प्रखंड की हरिपुरा, मिल्किया और जरिगांव पंचायतों में व्यापक विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। कुशवाहा भवन में आयोजित इन कार्यक्रमों में पारा विधिक स्वयंसेवकों और पैनल अधिवक्ताओं ने आम लोगों को यह संदेश दिया कि संवाद ही समाधान है और समाधान अगर आपसी सहमति से निकले, तो वही सच्चा न्याय होता है।

पंचायत से न्याय तक: ‘मेडिएशन फॉर नेशन-2’ के जरिए गांवों में पहुंचा संवाद से समाधान का मंत्र

-- हरिपुरा, मिल्किया और जरिगांव में विधिक जागरूकता शिविर, मध्यस्थता को बताया गया त्वरित, सुलभ और मानवीय न्याय का रास्ता

केटी न्यूज/बक्सर

न्याय की राह को आसान और मानवीय बनाने के उद्देश्य से ‘मेडिएशन फॉर नेशन-2’ कार्यक्रम के तहत बक्सर प्रखंड की हरिपुरा, मिल्किया और जरिगांव पंचायतों में व्यापक विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। कुशवाहा भवन में आयोजित इन कार्यक्रमों में पारा विधिक स्वयंसेवकों और पैनल अधिवक्ताओं ने आम लोगों को यह संदेश दिया कि संवाद ही समाधान है और समाधान अगर आपसी सहमति से निकले, तो वही सच्चा न्याय होता है।यह आयोजन बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के तत्वावधान में तथा पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशन में हुआ।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर के अध्यक्ष-सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झाम और सचिव नेहा दयाल के संयुक्त मार्गदर्शन में कार्यक्रम को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया।कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता चंद्रकला वर्मा ने मध्यस्थता (मेडिएशन) की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाते हुए बताया कि यह न्यायिक व्यवस्था की एक दूरदर्शी पहल है, जिससे विवादों का शीघ्र, सुलभ और सौहार्दपूर्ण समाधान संभव होता है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय स्तर पर मध्यस्थता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर है, ताकि अदालतों पर बढ़ते मुकदमों का बोझ कम हो और लोगों को समय पर न्याय मिले।

पारा विधिक स्वयंसेवक कविंद्र पाठक ने बताया कि मध्यस्थता से न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। पारिवारिक, वैवाहिक, संपत्ति, श्रम और व्यावसायिक विवादों में यह प्रक्रिया बेहद कारगर साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से निकला समाधान समाज में विश्वास और शांति को मजबूत करता है।कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी प्रमुखता से दिया गया कि “न्याय केवल निर्णय नहीं, बल्कि समाधान है।” जब विवाद बातचीत से सुलझते हैं, तो रिश्ते भी सुरक्षित रहते हैं और समाज में सौहार्द बना रहता है।

इसी क्रम में विधिक स्वयंसेवक अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि 14 मार्च 2026 को बक्सर न्याय मंडल में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जहां सभी सुलहनीय मामलों का निपटारा किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं।विधिक स्वयंसेविका मंजू कुमारी ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर चर्चा करते हुए बताया कि कानूनन विवाह की न्यूनतम आयु लड़की के लिए 18 वर्ष और लड़के के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। यह कानून वर्ष 2006 में बना और 2007 से लागू है। उन्होंने बाल विवाह के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला।