जंगली महादेव मंदिर बनेगा शुभ मंडप, एक ही वेदी पर 11 जोड़े रचाएंगे विवाह
डुमरांव के ऐतिहासिक जंगली महादेव मंदिर परिसर में 9 मार्च को एक अनोखा और सामाजिक संदेश देने वाला आयोजन होने जा रहा है। यहां सामूहिक विवाह महोत्सव के दौरान 11 जोड़े एक ही मंडप में वैदिक रीति-रिवाज के साथ सात फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग करना और समाज में सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देना है।

इस महोत्सव का आयोजन रुद्र सागर सेवा संस्थान के तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर डुमरांव के एक निजी सभागार में संस्था के सदस्यों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा, व्यवस्थाएं और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में गुजरात के पूर्व डीजीपी के.के. ओझा, संस्था के सचिव रवि शंकर चौबे, बाल कृष्ण चौबे, पूर्व मुखिया तेजनारायण ओझा, विंध्याचल ओझा, शिबू दुबे और सोनू ओझा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि सामूहिक विवाह के लिए अब तक 11 जोड़ों का पंजीकरण किया जा चुका है। सभी जोड़ों का विवाह पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया जाएगा। आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा, ताकि विवाह समारोह में शामिल होने वाले परिवारों और मेहमानों को उत्सव जैसा माहौल महसूस हो।
विवाह के बाद नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने के साथ-साथ बेटियों को दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक गृह उपयोगी सामग्री भी प्रदान की जाएगी। इसमें रसोई और घरेलू उपयोग की वस्तुएं शामिल होंगी, ताकि नवदंपति अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत सहज तरीके से कर सकें। संस्था का मानना है कि यह सहयोग केवल एक सामाजिक परंपरा निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा भी है।

संस्था के सदस्यों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य समाज में यह संदेश देना भी है कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को सादगी और सहयोग की भावना के साथ भी संपन्न कराया जा सकता है। सामूहिक विवाह न केवल अनावश्यक खर्च को कम करता है, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है।
बैठक में मौजूद गुजरात के पूर्व डीजीपी के.के. ओझा ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज के लिए प्रेरणादायक होते हैं। इससे उन परिवारों को भी हिम्मत मिलती है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बेटे-बेटियों की शादी कराने में असमर्थ महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह समाज में सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष 11 जोड़ों का विवाह कराया जा रहा है, लेकिन भविष्य में इसे और व्यापक स्वरूप देने की योजना है। अगले वर्ष संस्था की ओर से 21 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को इस पहल का लाभ मिल सके।
