राष्ट्रीय मंच पर चमकेगा बक्सर, चार पंचायतों के मुखिया होंगे सम्मानित
बक्सर जिला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है। ग्रामीण विकास, डिजिटल नवाचार, स्वच्छता और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के बल पर जिले की चार पंचायतों के मुखियाओं का चयन राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार समारोह 2025 के लिए किया गया है।

__ सिमरी की तीन पंचायतों समेत जिले की चार पंचायतों को मिली राष्ट्रीय पहचान, भारत मंडपम में 3 जून को होगा सम्मान समारोह
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर जिला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है। ग्रामीण विकास, डिजिटल नवाचार, स्वच्छता और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के बल पर जिले की चार पंचायतों के मुखियाओं का चयन राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार समारोह 2025 के लिए किया गया है। यह उपलब्धि न केवल संबंधित पंचायतों बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।पंचायती राज विभाग के बिहार राज्य पंचायत संसाधन संस्था के परियोजना निदेशक नवीन कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार चयनित जनप्रतिनिधि 1 जून 2026 को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। उन्हें 3 जून को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

चयनित प्रतिनिधियों के लिए ट्रेन टिकट की व्यवस्था भी विभाग की ओर से कर दी गई है।इस प्रतिष्ठित सूची में इटाढ़ी प्रखंड की अतरौना पंचायत के मुखिया सचिन्द्र सिंह तथा सिमरी प्रखंड की डुमरी पंचायत के मुखिया प्रेम सागर कुँवर, राजपुर-परसनपाह पंचायत की मुखिया मुनेश्वरी देवी और दुल्हपुर पंचायत की मुखिया देवान्ति देवी शामिल हैं। खास बात यह है कि अकेले सिमरी प्रखंड की तीन पंचायतों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।डुमरी पंचायत के मुखिया प्रेम सागर कुँवर ने पंचायती राज मंत्रालय की थीम “आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा युक्त गांव” के अनुरूप उल्लेखनीय कार्य किए हैं। पंचायत में सड़क, बिजली, सुरक्षित पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कई योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हुआ है।

पंचायत सरकार भवन के निर्माण कार्य को गति दी गई है तथा पंचायत स्तर पर इंटरनेट आधारित सेवाओं के विस्तार की तैयारी की जा रही है। सार्वजनिक सुविधाओं के विकास और महिला हितैषी योजनाओं के प्रभावी संचालन ने डुमरी पंचायत को जिला और राज्य स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।दुल्हपुर पंचायत की मुखिया देवान्ति देवी ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाया। “स्वच्छ एवं हरित पंचायत” थीम के अंतर्गत पंचायत में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित की गई। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया तथा एकल उपयोग वाली प्लास्टिक के खिलाफ जनजागरण अभियान संचालित किए गए। पंचायत में सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं को बढ़ावा दिया गया और वर्षा जल संचयन सहित जल संरक्षण की विभिन्न पहलें शुरू की गईं।

राजपुर-परसनपाह पंचायत की मुखिया मुनेश्वरी देवी ने पंचायत प्रशासन में तकनीक का सफल समावेश कर इसे जिले की पहली डिजिटल पंचायत के रूप में स्थापित किया है। पंचायत सरकार भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, जहां आरटीपीएस काउंटर, बैंकिंग सेवा, डाक सुविधा और डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हो रही है। भवन परिसर में पार्क और नक्षत्र वाटिका विकसित की गई है, जबकि पूरी व्यवस्था सोलर ऊर्जा संचालित वायरलेस सीसीटीवी निगरानी तंत्र से जुड़ी है। पंचायत को पंचायत लर्निंग सेंटर के रूप में भी विकसित किया गया है, जहां अन्य जिलों के जनप्रतिनिधि प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

वहीं अतरौना पंचायत के मुखिया सचिन्द्र सिंह की पंचायत को पंचायत लर्निंग सेंटर के रूप में विशेष पहचान मिली है। पंचायत में विकास योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन, जनभागीदारी को बढ़ावा देने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों ने इसे राज्य स्तर पर मॉडल पंचायत के रूप में स्थापित किया है।राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार के लिए जिले की चार पंचायतों का चयन इस बात का संकेत है कि बक्सर की ग्रामीण सरकारें अब केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नवाचार, सुशासन और सतत विकास के मॉडल प्रस्तुत कर देशभर में अपनी पहचान बना रही हैं। आने वाले दिनों में यह उपलब्धि जिले की अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

