रेल ट्रैक पर मां-बेटी की मौत, सात घंटे तक कार्रवाई का इंतजार
दानापुर–डीडीयू रेलखंड पर मंगलवार की सुबह विविगिरी हॉल्ट के समीप हुए दर्दनाक हादसे ने रेलवे और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। डाउन लाइन पर ट्रेन की चपेट में आने से एक महिला और उसकी तीन वर्षीय बेटी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद दोनों शव करीब सात घंटे तक रेलवे ट्रैक के किनारे पड़े रहे।

__ विविगिरी हॉल्ट के समीप हादसे के बाद क्षेत्राधिकार और प्रक्रिया में उलझा तंत्र, परिजनों के पहुंचने पर पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
केटी न्यूज/डुमरांव
दानापुर–डीडीयू रेलखंड पर मंगलवार की सुबह विविगिरी हॉल्ट के समीप हुए दर्दनाक हादसे ने रेलवे और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। डाउन लाइन पर ट्रेन की चपेट में आने से एक महिला और उसकी तीन वर्षीय बेटी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद दोनों शव करीब सात घंटे तक रेलवे ट्रैक के किनारे पड़े रहे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय पर कार्रवाई के बजाय संबंधित एजेंसियां क्षेत्राधिकार और औपचारिक प्रक्रियाओं में उलझी रहीं।मृतका की पहचान वाराणसी के मंडुआडीह निवासी 22 वर्षीय गोरख देवी के रूप में हुई है। हादसे में उनकी तीन वर्षीय बेटी लाडो की भी जान चली गई। जानकारी के अनुसार, गोरख देवी अपनी बच्ची के साथ बक्सर जिले के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के नोनियपुरा गांव स्थित अपने रिश्तेदार गोरिया प्रसाद के घर जा रही थीं।

बताया जाता है कि वह ट्रेन से डुमरांव पहुंचीं, जिसके बाद गांव जाने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे पैदल निकल पड़ीं।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब सात बजे विविगिरी हॉल्ट के समीप डाउन लाइन पर तेज गति से आ रही ट्रेन की चपेट में मां-बेटी आ गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद दोनों शव लगभग 700 मीटर की दूरी पर पड़े मिले। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पुलिस व रेलवे प्रशासन को सूचना दी गई।सूचना मिलने पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) तथा कृष्णाब्रह्म थाना पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि तत्काल आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि शवों को हटाने और आगे की प्रक्रिया शुरू करने में क्षेत्राधिकार और परिजनों के आने की प्रतीक्षा को लेकर लंबा विलंब हुआ। इस दौरान दोनों शव खुले में रेलवे ट्रैक के किनारे पड़े रहे, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।

ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी दुर्घटना के बाद सबसे पहले मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शवों को सम्मानपूर्वक सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहिए था। उनका कहना था कि प्रशासनिक समन्वय की कमी और निर्णय लेने में देरी के कारण संवेदनशील मामले में भी कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी।करीब दोपहर 2:40 बजे परिजनों के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। यह हादसा न केवल रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है, बल्कि आपदा जैसी परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित मानवीय कार्रवाई की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

