दहशत : शिक्षा माफियाओ के खिलाफ डीपीओ स्थापना रजनीश उपाध्याय सहित जांच टीम ने खड़े किए हाथ
केटी न्यूज /बक्सर। जिला शिक्षा कार्यालय की अनियमितताएं रूकने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि यह अनियमितताएं अधिकारियों व कर्मियों की मिली भगत के बिना संभव नहीं है। इसी क्रम में यह सामने आया हाउसकिंपिंग एजेंसी फस्र्ट आईडिया मूल के नाम से मिलते जुलते दूसरी कंपनी ने काम करना शुरू कर दिया था। इसके कार्य आवंटन से लेकर भुगतान में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। करोड़ों रूपए गबन हुए है।
बता दें इस कंपनी को लेकर पूर्व भी विवाद हुआ था। जिसमें स्थानीय सांसद के नजदीकी अरविंद सिंह का नाम सामने आया था। नजदीकी के खाता में राशि जाने का भी पुख्ता प्रमाण सामने आया था। जब इस बात का खुलासा हुआ था तब जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन ने डीपीओ स्थापना, रजनीश उपाध्याय, चंदन द्विवेदी व सदर बीईओ अजय कुमार की तीन सदस्यीय टीम दिसंबर माह में गठित की। तीन माह बाद टीम ने जांच पूरी नहीं की। बल्कि यह पत्र डीईओ को दिया कि शिक्षा से अलग दूसरे विभाग के अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच कराई जाए।

इसके बाद कई मामले खुलकर सामने आने लगे है। विभागीय सूत्रों ने कहना है कि सांसद के नजदीकी व शिक्षा विभाग में तथाकथित अपना दबदबा रखने वाले अरविंद सिंह व अजय सिंह लगातार इस टीम पर अपना दबाव बना रहे थे कि गलत तरीके से कार्य लेने से लेकर भुगतान तक में क्लीन चिट मिल जाए। सूत्रों का कहना है कि जांच टीम के मोबाइल नंबर विशेषकर वाटशअप काॅलिंग को खंगाला जाए। जब यह सामने आएगा कि अजय सिंह व अरविंद सिंह कितनी बार टीम के अधिकारियों से संपर्क स्थापित किए है। डीपीओ स्थापना रजनीश उपाध्याय व डीपीओ चंदन द्विवेदी के कार्यालय में लगे सीसीटीवी भी सारी कहानी बयान कर देंगी। इस मामले को दबाने के लिए जिले के वरीय अधिकारी पीजीआरओ शशिकांत पासवान व जिला स्थापना पदाधिकारी अलमा मुख्तार का भी सामने आ रहा है।

हालांकि जांच के बाद भी सारी स्थिति स्पष्ट हो पाएगा। इस पूरे मामले को दबाने में कौन-कौन अधिकारी शामिल है। वहीं डीईओ संदीप रंजन के समक्ष यह विकट संकट खड़ा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वह कहां पत्राचार करें।
