रमजान में बढ़ी फलों की कीमतें, इफ्तार की तैयारी पर पड़ रहा असर
केटी न्यूज/डुमरांव पवित्र माह रमजान की शुरुआत के साथ ही डुमरांव के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। शाम होते ही लोग इफ्तार की तैयारी के लिए बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि इस बार रोजेदारों की थाली पर महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर इफ्तार में शामिल होने वाले फलों की कीमतों में अचानक आई बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
पिछले एक सप्ताह के भीतर कई प्रमुख फलों के दामों में 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में पहले 120 रुपये किलो बिकने वाला सेब अब करीब 150 रुपये किलो हो गया है। इसी तरह संतरा 50 रुपये से बढ़कर लगभग 65 रुपये किलो, पपीता 40 रुपये से बढ़कर 60 रुपये किलो और तरबूज 60 रुपये से बढ़कर करीब 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं अनार की कीमत 140 रुपये से बढ़कर 160 रुपये किलो तक हो गई है। रमजान से पहले 60 रुपये में मिलने वाला नारियल डाभ भी अब 70 से 80 रुपये तक बिक रहा है।
फल विक्रेताओं का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। स्थानीय फल विक्रेता रौशन कुमार के अनुसार अधिकांश फल दूसरे राज्यों से मंगवाए जाते हैं। परिवहन लागत में वृद्धि और रमजान के दौरान अचानक बढ़ी मांग के कारण बाजार में कीमतें ऊपर चली गई हैं।
रोजेदारों के लिए इफ्तार में फल का विशेष महत्व होता है। दिनभर के उपवास के बाद लोग हल्का और पौष्टिक आहार लेना पसंद करते हैं, जिसमें सेब, संतरा, पपीता, तरबूज और अनार जैसे फल अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में मांग बढ़ने से खुदरा बाजार में कीमतों पर सीधा असर देखने को मिल रहा है।
फलों की कीमतों में आई तेजी का सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ा है। कई परिवार अब पहले की तुलना में कम मात्रा में फल खरीद रहे हैं। स्थानीय गृहिणियों का कहना है कि पहले जहां रोजाना तीन-चार प्रकार के फल खरीदे जाते थे, वहीं अब बजट के कारण एक या दो फलों तक ही सीमित रहना पड़ रहा है।
इसके बावजूद रमजान की रौनक में कोई कमी नहीं आई है। लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। स्थानीय फल मंडी, राजगोला मंडी, चूड़ी बाजार और चौक रोड जैसे बाजारों में देर शाम तक अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है। दुकानों की रोशनी और खरीददारों की आवाजाही से पूरा बाजार रमजान के माहौल में डूबा हुआ नजर आ रहा है।
