खरीफ महाभियान का आगाज: जलवायु चुनौतियों के बीच फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक खेती पर जोर
कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से सोमवार को बक्सर में जिला स्तरीय खरीफ महाभियान का शुभारंभ किया गया। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) के तत्वावधान में नगर भवन में आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी साहिला एवं उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

__ डीएम ने किसानों से स्वायल हेल्थ कार्ड के अनुसार उर्वरक उपयोग की अपील की, 10 से 22 जून तक प्रखंड स्तर पर चलेंगे अभियान
केटी न्यूज/बक्सर
कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से सोमवार को बक्सर में जिला स्तरीय खरीफ महाभियान का शुभारंभ किया गया। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) के तत्वावधान में नगर भवन में आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी साहिला एवं उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी साहिला ने कहा कि खरीफ महाभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज कृषि क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

बढ़ते तापमान, हीट वेव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधीकरण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि जोखिम कम हो और आय के नए स्रोत विकसित हो सकें।जिलाधिकारी ने कृषि विभाग के प्रसार कर्मियों को निर्देश दिया कि वे गांव-गांव जाकर नियमित रूप से संध्या किसान चौपाल का आयोजन करें। चौपालों के माध्यम से कृषि एवं इससे जुड़े विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी किसानों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई जाए। साथ ही किसानों की समस्याओं को संकलित कर संबंधित विभागों के समन्वय से उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने स्वायल हेल्थ कार्ड की उपयोगिता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसानों को कार्ड में निर्धारित अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे भूमि की उर्वरता बनी रहेगी, उत्पादन लागत घटेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक तरीके से खेती करने तथा स्वायल हेल्थ कार्ड के निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ भूमि संरक्षण भी संभव है।इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी ने खरीफ मौसम में संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने कृषि मैपर, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा फार्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों में 10 से 22 जून तक प्रखंड स्तरीय खरीफ महाभियान आयोजित किया जाएगा। वहीं 11 से 30 जून तक कृषि जनकल्याण चौपाल-सह-खेत बचाओ अभियान भी चलाया जाएगा।उन्होंने कहा कि इन अभियानों के माध्यम से किसानों को विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे वे तकनीक आधारित खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकेंगे। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों तथा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

