केस डायरी दबाने पर कोर्ट सख्त, दारोगा के वेतन से कटेंगे 3 हजार रुपये

पॉक्सो मामलों की जांच में लापरवाही पर बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक जांच अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-6 सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अमित कुमार शर्मा ने तीन अलग-अलग मामलों में अनुसंधान अधिकारी के वेतन से एक-एक हजार रुपये, यानी कुल तीन हजार रुपये काटकर 15 दिनों के भीतर नजारत में जमा कराने का निर्देश दिया है।

केस डायरी दबाने पर कोर्ट सख्त, दारोगा के वेतन से कटेंगे 3 हजार रुपये

__ पॉक्सो कोर्ट ने एसपी से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट, जांच अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी सिफारिश

केटी न्यूज/बक्सर

पॉक्सो मामलों की जांच में लापरवाही पर बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक जांच अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-6 सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अमित कुमार शर्मा ने तीन अलग-अलग मामलों में अनुसंधान अधिकारी के वेतन से एक-एक हजार रुपये, यानी कुल तीन हजार रुपये काटकर 15 दिनों के भीतर नजारत में जमा कराने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस अधीक्षक को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अगली तिथि से पहले कार्रवाई रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है।मामला इटाढ़ी थाना कांड संख्या 337/22, 266/24 एवं 37/25 से जुड़ा है। इन मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अनुसंधान अधिकारी गुड्डी कुमारी ने जांच पूरी होने के बावजूद अंतिम प्रतिवेदन और केस डायरी एक वर्ष से अधिक समय तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की।

न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा करार दिया।अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट कहा कि अंतिम प्रतिवेदन पहले ही तैयार हो चुका था, इसके बावजूद बिना किसी वैध कारण के केस डायरी और अन्य अभिलेख पुलिस के पास ही पड़े रहे। जबकि कानून के अनुसार जांच पूरी होने के तीन दिनों के भीतर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में समर्पित किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, जांच अधिकारी ने इस असामान्य देरी का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी नहीं दिया।न्यायालय ने इसे न्यायिक आदेशों की अवहेलना मानते हुए संबंधित जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी संस्तुति की है। साथ ही उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए तीनों मामलों में प्रतीकात्मक आर्थिक दंड लगाया है। अदालत के इस कड़े रुख को पुलिस अनुसंधान में लापरवाही के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।