डुमरांव में जलजमाव से किसान परेशान, खिरौली की 100 एकड़ जमीन सालभर रहती है डूबी

नगर क्षेत्र से सटे खिरौली गांव में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण करीब 100 एकड़ भूमि स्थायी रूप से जलमग्न बनी हुई है। शहर का अधिकांश बरसाती और नाली का पानी इसी इलाके में आकर जमा हो जाता है, जिससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि वर्षा के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है—खेत तालाब में तब्दील हो जाते हैं और फसल लगाना तक मुश्किल हो जाता है।

डुमरांव में जलजमाव से किसान परेशान, खिरौली की 100 एकड़ जमीन सालभर रहती है डूबी

केटी न्यूज/डुमरांव

नगर क्षेत्र से सटे खिरौली गांव में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण करीब 100 एकड़ भूमि स्थायी रूप से जलमग्न बनी हुई है। शहर का अधिकांश बरसाती और नाली का पानी इसी इलाके में आकर जमा हो जाता है, जिससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि वर्षा के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है—खेत तालाब में तब्दील हो जाते हैं और फसल लगाना तक मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, जलजमाव के कारण न केवल कृषि उत्पादन घटा है, बल्कि आसपास के घरों और सड़कों पर भी पानी भरने से आवागमन बाधित होता है। मच्छरों और गंदगी की वजह से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। कई बार संबंधित विभाग को अवगत कराने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की मुख्य सड़कों के दोनों किनारों पर सुदृढ़ नाला निर्माण और पानी निकासी की समग्र योजना के बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग 120 के लेफ्ट ओवर सेक्शन पर नाला नहीं होने से पानी का प्रवाह बाधित होता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जलनिकासी की ठोस व्यवस्था कर खेती और जनजीवन को राहत दी जाए, ताकि हर साल की इस समस्या से स्थायी निजात मिल सके।