शिक्षा विभाग में करोड़ों की वसूली का आरोप, सांसद सुधाकर सिंह पर घिरे सवाल
बक्सर जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े कथित वसूली और वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शनिवार को भाजपा के जिला प्रवक्ता दीपक पांडेय ने प्रेस वार्ता आयोजित कर स्थानीय सांसद सुधाकर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
प्रेस वार्ता में दीपक पांडेय ने कहा कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत संसदीय मंत्रालय से प्राप्त पत्र के अनुसार लोकसभा सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र में किसी भी विभाग के लिए किसी व्यक्ति को अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद सांसद सुधाकर सिंह द्वारा पत्रांक बीएक्सआर/138 दिनांक 28 दिसंबर 2024 के माध्यम से जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर अरविंद कुमार सिंह को अपना प्राधिकृत सहयोगी नामित किया गया, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।

दीपक पांडेय ने आरोप लगाया कि सांसद के कथित संरक्षण में अरविंद कुमार सिंह और उनके सहयोगी अजय सिंह शिक्षा विभाग में नियोजित शिक्षकों और अन्य कर्मियों से हर महीने तीन हजार से सात हजार रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में प्राथमिकी भी दर्ज बताई जाती है और कई मौकों पर अधिकारियों व शिक्षकों पर दबाव बनाने तथा मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों द्वारा इनकी गतिविधियों के खिलाफ लिखित शिकायत भी की गई है। पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र पांडेय द्वारा जान से मारने की धमकी दिए जाने की शिकायत भी प्रशासन को दी गई थी। इसके बावजूद अब तक किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है।
प्रेस वार्ता के दौरान दीपक पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि कथित प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अरविंद सिंह ने शिक्षा विभाग में बेंच-डेस्क आपूर्ति, मिड डे मील सामग्री, बर्तन वितरण और टूल किट जैसी योजनाओं से जुड़े करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके भी प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
मामले में एक और गंभीर आरोप का जिक्र करते हुए दीपक पांडेय ने कहा कि फस्ट आइडिया डिजीटल एप्लीकेशन नामक कंपनी से जुड़े टेंडर में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है। आरोप है कि एक कंपनी के नाम से निविदा भरकर मिलते-जुलते नाम वाली दूसरी कंपनी फर्स्ट आइडिया डिजीटल्स एप्लीकेशन्स के साथ एकरारनामा कर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि दिशा की बैठकों में भी सांसद सुधाकर सिंह इस कंपनी के पक्ष में लगातार आवाज उठाते रहे और जिला पदाधिकारी के समक्ष लिखित रूप से इसकी पैरवी भी की गई। ऐसे में यदि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि संबंधित कंपनी के खाते से अरविंद सिंह, तथा उनके रिश्तेदारों के खातों में धनराशि जाने की भी चर्चा है। उन्होंने कहा कि यदि यह तथ्य सही है तो यह पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना देता है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि वसूली और भ्रष्टाचार का ऐसा तंत्र सक्रिय है तो यह पूरे समाज के लिए चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे।
प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि हम इस पूरे मामले को राज्य सरकार के समक्ष उठाएंगे। शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री तक इसकी जानकारी देकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे, ताकि शिक्षा विभाग में चल रहे कथित वसूली तंत्र और वित्तीय अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके।
दीपक पांडेय ने यह भी मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, कथित वसूली और वित्तीय लेन-देन की जांच हो तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही फर्स्ट आइडिया डिजीटल्स एप्लीकेशन्स को किए गए भुगतान की विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।
प्रेस वार्ता के बाद जिले के राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाती है।
