भव्य भंडारे के साथ संपन्न हुआ 18वां श्री सद्गुरुदेव महोत्सव, सीताराम विवाह की कथा ने बांधा भक्तों का मन
श्री हनुमत धाम मंदिर परिसर में पांच दिनों तक चला 18वां श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव बुधवार को भव्य महाभंडारे के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक संपन्न हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन प्रभु श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हजारों साधु-संतों और ग्रामीण भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
-- हनुमत धाम में देखने को मिला आस्था, भक्ति और परंपरा का संगम
केटी न्यूज/बक्सर
श्री हनुमत धाम मंदिर परिसर में पांच दिनों तक चला 18वां श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव बुधवार को भव्य महाभंडारे के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक संपन्न हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन प्रभु श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हजारों साधु-संतों और ग्रामीण भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

-- धनुष यज्ञ से विवाह तक, कथा ने रचा आध्यात्मिक दृश्य
महोत्सव के पांचवें और अंतिम दिन अयोध्या धाम के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण जी ने पुष्प वाटिका (फुलवारी) प्रसंग, धनुष यज्ञ एवं सीतादृराम विवाह की कथा का अत्यंत भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जैसे ही प्रभु श्रीराम ने शिव धनुष का भंजन किया, मानो संपूर्ण ब्रह्मांड “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। कथा के दौरान श्रोताओं की आंखों में भक्ति के आंसू और चेहरे पर आनंद की झलक साफ दिखाई दी।
-- मिथिला के मंगल गीतों से जीवंत हुआ जनकपुर
सीतादृराम विवाह प्रसंग के समय पंडाल में श्री मामा जी महाराज द्वारा रचित मिथिला के पारंपरिक मंगल गीतों की मधुर गूंज ने वातावरण को और भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं को ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात् जनकपुर धाम कमरपुर की धरती पर उतर आया हो। गीत, कथा और भक्ति के संगम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

-- साधु-संतों का समागम और गुरु वंदना
समापन अवसर पर बक्सर सहित दूर-दराज से आए हजारों साधु-संतों ने पूज्य मामा जी महाराज एवं श्री महात्मा जी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर गुरु वंदना की। कथा व्यास ने गुरु महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महोत्सव का 18वां वर्ष गुरुदेव के संकल्पों और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।
-- विशाल भंडारे के साथ पूर्णाहुति
कथा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। श्री नेहनिधि नारायण सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने संतों और भक्तों की सेवा में अद्भुत समर्पण दिखाया। महोत्सव की सफलता में ग्रामीणों और महाराज श्री के परिकर तन, मन और धन से जुटे रहे, जिससे यह आयोजन अविस्मरणीय बन गया।

