डर की जगह मुस्कान, सख़्ती की जगह संवेदना: डुमरांव इंटर कॉलेज बना परीक्षा का मॉडल केंद्र

जहां आमतौर पर परीक्षा केंद्रों की पहचान सख़्त निगरानी, तनाव और भय से जुड़ी होती है, वहीं डुमरांव स्थित इंटर कॉलेज ने इस सोच को पूरी तरह उलट दिया। इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन कॉलेज ने परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव जैसा अनुभव बनाने की अनोखी पहल कर सबका ध्यान खींचा। कॉलेज को मॉडल परीक्षा केंद्र के रूप में सजाया गया और परीक्षार्थियों का स्वागत फूलों और चॉकलेट से किया गया।

डर की जगह मुस्कान, सख़्ती की जगह संवेदना: डुमरांव इंटर कॉलेज बना परीक्षा का मॉडल केंद्र

केटी न्यूज/डुमरांव

जहां आमतौर पर परीक्षा केंद्रों की पहचान सख़्त निगरानी, तनाव और भय से जुड़ी होती है, वहीं डुमरांव स्थित इंटर कॉलेज ने इस सोच को पूरी तरह उलट दिया। इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन कॉलेज ने परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव जैसा अनुभव बनाने की अनोखी पहल कर सबका ध्यान खींचा। कॉलेज को मॉडल परीक्षा केंद्र के रूप में सजाया गया और परीक्षार्थियों का स्वागत फूलों और चॉकलेट से किया गया।सुबह जैसे ही छात्र-छात्राएं परीक्षा केंद्र पहुंचे, वहां का दृश्य सामान्य से बिल्कुल अलग था। हाथों में फूलों के बुके, चेहरे पर मुस्कान और “बेस्ट ऑफ लक” के शब्द—इस आत्मीय माहौल ने बच्चों के मन से परीक्षा का डर काफी हद तक दूर कर दिया।

वीक्षक और शिक्षक केवल निगरानीकर्ता नहीं, बल्कि मनोबल बढ़ाने वाले साथी की भूमिका में नजर आए। प्रवेश करते समय बच्चों के सिर पर फूलों की पंखुड़ियां डालकर उन्हें सकारात्मक ऊर्जा के साथ परीक्षा कक्ष तक भेजा गया।परीक्षा केंद्र अधीक्षक फरहत अफसान ने बताया कि यह पहल बच्चों के मानसिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि अक्सर परीक्षा को लेकर बच्चों में अनावश्यक भय बैठा दिया जाता है, जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है। यदि माहौल सहज और मानवीय हो, तो बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसी सोच के साथ कॉलेज प्रशासन ने यह अभिनव प्रयोग किया।

इस पहल का असर भी साफ दिखा। कई परीक्षार्थियों ने कहा कि पहली बार उन्हें परीक्षा केंद्र पर घबराहट नहीं हुई। अभिभावकों ने भी कॉलेज की सराहना करते हुए कहा कि यदि हर परीक्षा केंद्र ऐसा हो, तो परीक्षा बच्चों के लिए डर नहीं, चुनौती बन सकती है।डुमरांव इंटर कॉलेज की यह पहल केवल एक स्वागत कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मानवीय और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश है—कि परीक्षा अनुशासन के साथ-साथ आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भी बेहतर बनाई जा सकती है।