वैज्ञानिक खेती से आत्मनिर्भर बनेंगी महिला किसान, कृषि विज्ञान केंद्र में 75 कृषकों को मिला प्रशिक्षण
राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर में आयोजित रबी किसान गोष्ठी में महिला किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के मार्गदर्शन में आयोजित गोष्ठी में जिले की 75 महिला किसानों ने भाग लिया।

__ रबी गोष्ठी में उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और मृदा संरक्षण पर जोर; सब्जियों व फलदार पौधों का वितरण कर महिलाओं को किया प्रोत्साहित
केटी न्यूज/बक्सर।
राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर में आयोजित रबी किसान गोष्ठी में महिला किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के मार्गदर्शन में आयोजित गोष्ठी में जिले की 75 महिला किसानों ने भाग लिया। इस दौरान उन्नत बीजों के चयन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती, फसल सुरक्षा और बागवानी की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही महिला किसानों के बीच विभिन्न सब्जियों और फलदार पौधों का वितरण भी किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. देवकरन तथा प्रगतिशील महिला कृषकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। गोष्ठी का मुख्य विषय ‘कृषि चुनौतियां—वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधान’ रहा।

__ मिट्टी की जांच के आधार पर करें उर्वरकों का इस्तेमाल
डॉ. देवकरन ने रबी फसलों की तैयारी के लिए किसानों को जरूरी सुझाव दिए। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल की अपील की। उन्होंने मसूर की पूसा अगेती, आईपीएल-220 और मालवीय मसूर-57, चना की स्वर्ण लक्ष्मी, जीएनजी-2299 और जीएनजी-2207 तथा मटर एवं सरसों की उन्नत किस्मों की जानकारी दी। तीसी की सबौर तीसी-2 सहित अन्य फसलों की वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों से भी किसानों को अवगत कराया गया।उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक प्रयोग से बचने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

__ सब्जियों और फलदार पौधों का वितरण
महिला किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए शिमला मिर्च, बैंगन, मिर्च, फूलगोभी और पत्तागोभी की उन्नत किस्मों के पौधे वितरित किए गए। अमरूद और लीची के पौधे भी दिए गए। पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र के प्रक्षेत्र की मेड़ पर आम्रपाली आम का पौधा लगाया गया।उप निदेशक उद्यान किरण भारती ने केला, अमरूद, आम और ड्रैगन फ्रूट की खेती के साथ फूलों की खेती की तकनीकों तथा उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। वहीं, नाबार्ड के डीडीएम आनंद बर्धन ने स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के गठन, सामूहिक कृषि गतिविधियों तथा वित्तीय योजनाओं के बारे में बताया।

__ तकनीकी सत्र में रोग प्रबंधन पर चर्चा
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञ हरिगोबिन्द ने प्राकृतिक खेती और बीज उत्पादन की तकनीकें बताईं। डॉ. रामकेवल ने फसलों में लगने वाले रोगों एवं कीटों की पहचान, उनके प्रबंधन और जलवायु अनुकूल खेती के उपाय समझाए। इसके बाद महिला किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया। प्रक्षेत्र प्रबंधक आरीफ प्रवेज ने विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों की तकनीकी विशेषताओं और उपयोगिता से अवगत कराया।गोष्ठी में भगवती देवी, सोनम कुमारी, तेतरी देवी, सविता देवी, तिजिया देवी, कबुतरी देवी, आशा देवी और संतोषी देवी सहित 75 महिला किसानों ने भाग लिया। आयोजन में केंद्र के रवि चटर्जी, राकेश मणि, राजेश कुमार राय, सरफराज अहमद खान, मुकेश कुमार सहित अन्य कर्मियों ने सहयोग किया।

