चौसा में किसानों को दी गई टिकाऊ खेती की सीख, पराली न जलाने की अपील

चौसा प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया गया। कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न पंचायतों में टीम भेजकर किसानों को पराली प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। अभियान का नेतृत्व प्रखंड कृषि पदाधिकारी राकेश कुमार ने किया।

चौसा में किसानों को दी गई टिकाऊ खेती की सीख, पराली न जलाने की अपील

__ गांव-गांव पहुंची कृषि विभाग की टीम, मृदा जांच के आधार पर उर्वरक प्रयोग और आधुनिक यंत्रों की दी जानकारी

केटी न्यूज/चौसा

चौसा प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया गया। कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न पंचायतों में टीम भेजकर किसानों को पराली प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। अभियान का नेतृत्व प्रखंड कृषि पदाधिकारी राकेश कुमार ने किया।कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग की टीम गांव-गांव पहुंची और किसानों के साथ बैठक कर खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने किसानों से कहा कि फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाना पर्यावरण और भूमि दोनों के लिए हानिकारक है।

पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, साथ ही खेत की ऊपरी सतह में मौजूद लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वर शक्ति प्रभावित होती है।किसानों को सलाह दी गई कि पराली को खेत में सड़ाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और रासायनिक खाद पर निर्भरता भी कम होगी। कृषि विशेषज्ञों ने हैप्पी सीडर, रोटावेटर समेत अन्य कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि इन मशीनों की मदद से पराली का सुरक्षित एवं उपयोगी प्रबंधन किया जा सकता है।अभियान के दौरान उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि बिना मृदा परीक्षण के अंधाधुंध खाद डालना नुकसानदायक हो सकता है।

मृदा जांच रिपोर्ट के अनुसार उर्वरक प्रयोग करने से लागत घटती है, उत्पादन बढ़ता है और भूमि की सेहत भी सुरक्षित रहती है। अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उत्पादकता धीरे-धीरे कम होने लगती है।इस मौके पर मौजूद कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों ने किसानों के सवालों का जवाब दिया तथा खेती से जुड़ी व्यावहारिक जानकारियां साझा कीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और कृषि विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे खेती के लिए उपयोगी बताया।