__ सीआईएसएफ की अग्निशमन टीम ने दिया विशेष प्रशिक्षण, बताया किस तरह की आग पर कौन-सा अग्निशामक यंत्र है कारगर
केटी न्यूज/चौसा :
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर आगजनी की छोटी-सी घटना भी बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। खासकर ऐसे हालात में, जब अस्पताल में भर्ती मरीज खुद से सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में सक्षम नहीं होते। इसी खतरे को देखते हुए चौसा अस्पताल में अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सीआईएसएफ की अग्निशमन टीम ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को आग से बचाव, नियंत्रण और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के तरीके सिखाए।प्रशिक्षण के दौरान सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह, आरके मुरारी और सूरज कुमार ने आग की विभिन्न श्रेणियों और उनसे निपटने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी।

टीम ने स्पष्ट किया कि आग बुझाने में सबसे महत्वपूर्ण उसकी प्रकृति की पहचान करना है। हर तरह की आग पर एक ही अग्निशामक यंत्र का इस्तेमाल करना खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए परिस्थिति के अनुसार सही उपकरण का चयन जरूरी है।अग्निशमन कर्मियों ने बताया कि लकड़ी, कागज और कपड़े जैसे ठोस ज्वलनशील पदार्थों में लगी आग पर पानी का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं पेट्रोल और डीजल जैसे ज्वलनशील तरल पदार्थों की आग बुझाने के लिए फोम प्रभावी होता है। गैस से लगी आग पर कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) तथा विद्युत उपकरणों में आग लगने की स्थिति में ड्राई केमिकल पाउडर आधारित अग्निशामक यंत्र का उपयोग किया जाता है। गलत तरीके से आग बुझाने की कोशिश नुकसान को और बढ़ा सकती है।

टीम ने अस्पतालकर्मियों को अग्निशामक यंत्रों के संचालन, आपातकालीन परिस्थितियों में सावधानी बरतने और आग लगने पर बिना घबराए तत्काल उचित कदम उठाने की जानकारी दी। साथ ही बताया कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा केवल उपकरणों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मियों को उनके सही इस्तेमाल का व्यावहारिक ज्ञान होना भी उतना ही जरूरी है।कार्यक्रम में अस्पताल प्रभारी डॉ. भारती, डॉ. मणिपाल समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।





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