Tuesday, 3 November 2026
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Keshav Times

अस्पताल में मशीनें धूल फांक रहीं, मरीजों के हक के लिए अनिश्चितकालीन धरना

अनुमंडल अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के दावों की हकीकत फिजियोथेरेपी सेवा की बदहाली ने उजागर कर दी है। करीब एक साल पहले अस्पताल को उपलब्ध कराई गई आधुनिक फिजियोथेरेपी मशीनें आज तक इंस्टॉल नहीं हो सकी हैं। नतीजा यह है कि सरकारी अस्पताल में सुविधा मौजूद होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

अस्पताल में मशीनें धूल फांक रहीं, मरीजों के हक के लिए अनिश्चितकालीन धरना

__ एक साल से इंस्टॉलेशन का इंतजार कर रहीं लाखों की आधुनिक मशीनें, कागजों पर चल रही फिजियोथेरेपी सेवा; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

केटी न्यूज/डुमरांव। 

अनुमंडल अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के दावों की हकीकत फिजियोथेरेपी सेवा की बदहाली ने उजागर कर दी है। करीब एक साल पहले अस्पताल को उपलब्ध कराई गई आधुनिक फिजियोथेरेपी मशीनें आज तक इंस्टॉल नहीं हो सकी हैं। नतीजा यह है कि सरकारी अस्पताल में सुविधा मौजूद होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही के खिलाफ सोमवार से समाजसेवी हरेकृष्ण सिंह यादव ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक मशीनों को इंस्टॉल कर नियमित सेवा बहाल करने का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

अस्पताल में मशीनें धूल फांक रहीं, मरीजों के हक के लिए अनिश्चितकालीन धरना

धरनार्थी का आरोप है कि अनुमंडल अस्पताल में फिजियोथेरेपी की व्यवस्था केवल कागजों तक सिमटकर रह गई है। रोस्टर में प्रतिदिन फिजियोथेरेपिस्ट की ड्यूटी निर्धारित है, लेकिन मरीजों को नियमित उपचार नहीं मिल पाता। कभी चिकित्सक फिजियोथेरेपी कक्ष में उपलब्ध नहीं रहते तो कभी उनकी ड्यूटी सामान्य ओपीडी अथवा इमरजेंसी में लगा दी जाती है। ऐसे में फिजियोथेरेपी के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है।

अस्पताल में मशीनें धूल फांक रहीं, मरीजों के हक के लिए अनिश्चितकालीन धरना

__ चिकित्सक मौजूद, लेकिन मशीनें नदारद

सोमवार को अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अजय कुमार सिंह मौजूद थे और फिजियोथेरेपी कक्ष का संचालन भी हो रहा था। इसके बावजूद अस्पताल को उपलब्ध कराई गई आधुनिक मशीनें कक्ष में नहीं थीं। इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए हरेकृष्ण सिंह यादव ने पूछा कि जब सरकार ने उपकरण उपलब्ध करा दिए हैं तो आखिर उनका इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है? मशीनें कहां रखी गई हैं और अब तक उन्हें इंस्टॉल क्यों नहीं कराया गया, इसका जवाब अस्पताल प्रशासन को देना चाहिए।

अस्पताल में मशीनें धूल फांक रहीं, मरीजों के हक के लिए अनिश्चितकालीन धरना

__ सीएस की पहल भी नहीं आई काम

गौरतलब है कि डुमरांव अनुमंडल अस्पताल में लंबे समय से फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती है, लेकिन आवश्यक उपकरणों के अभाव में मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा था। मामला संज्ञान में आने के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल की थी। उन्होंने तत्कालीन अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार सिंह को जिला औषधि भंडार से उपकरणों का उठाव करने का निर्देश दिया था। इसके बाद अस्पताल को फिजियोथेरेपी की कई आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गईं।

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इन उपकरणों में मोम स्नान चिकित्सा मशीन, स्टेटिक साइकिल, वॉकर, इंटरफेसियल थेरेपी उपकरण, विद्युत उत्तेजना उपकरण और अवरक्त विकिरण उपकरण सहित अन्य सामग्री शामिल हैं। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी इनका समुचित इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका। बाद में तत्कालीन प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. श्रुति प्रकाश के कार्यकाल में फिजियोथेरेपिस्ट को कक्ष संख्या-9 आवंटित किया गया और प्रतिदिन का रोस्टर भी तैयार हुआ। इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

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__ मजबूरी में निजी केंद्रों का चक्कर लगा रहे मरीज

धरनार्थियों का कहना है कि उपकरण उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर कई मरीजों को बुनियाद केंद्र भेज दिया जाता है। वहां फिजियोथेरेपी की सुविधा मुख्य रूप से वृद्धजनों के लिए उपलब्ध है। ऐसे में अन्य जरूरतमंद मरीजों को निजी फिजियोथेरेपी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उपचार के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। सरकारी अस्पताल में उपकरण उपलब्ध रहने के बावजूद मरीजों पर निजी उपचार का आर्थिक बोझ पड़ना व्यवस्था की गंभीर विफलता है।धरने के माध्यम से मांग की गई है कि सभी मशीनों को तत्काल इंस्टॉल कर चालू कराया जाए, फिजियोथेरेपिस्ट की नियमित ड्यूटी फिजियोथेरेपी कक्ष में सुनिश्चित हो तथा अस्पताल पहुंची मशीनों के अब तक इस्तेमाल में नहीं आने और उनके वर्तमान स्थान की जांच कराई जाए। धरनार्थी ने सवाल उठाया कि जब सरकार मरीजों की सुविधा के लिए संसाधन उपलब्ध करा रही है तो स्थानीय स्तर पर लापरवाही के कारण उनका लाभ मरीजों तक क्यों नहीं पहुंच रहा है। खबर लिखे जाने तक धरना जारी था और समाजसेवी अपनी मांगों पर अड़े हुए थे।

अस्पताल में मशीनें धूल फांक रहीं, मरीजों के हक के लिए अनिश्चितकालीन धरना

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