खेती की सुस्ती पर डीएम सख्त, अफसरों को समय-सीमा में काम पूरा करने का अल्टीमेटम
कृषि क्षेत्र से जुड़े कार्यों में लापरवाही और धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी साहिला ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने का आदेश दिया है। गुरुवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिला कृषि टास्क फोर्स तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों—सहकारिता, मत्स्य एवं पशुपालन—की समीक्षा बैठक में डीएम ने उर्वरक उपलब्धता, किसान सम्मान निधि, सिंचाई, कृषि प्रसंस्करण और नवाचार सहित विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की।

__ उर्वरक से लेकर सिंचाई और प्रसंस्करण तक की समीक्षा में खुली विभागीय सुस्ती; महज 4.8 फीसदी कार्य प्रगति पर कार्यपालक अभियंता से मांगा स्पष्टीकरण
केटी न्यूज/बक्सर।
कृषि क्षेत्र से जुड़े कार्यों में लापरवाही और धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी साहिला ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने का आदेश दिया है। गुरुवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिला कृषि टास्क फोर्स तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों—सहकारिता, मत्स्य एवं पशुपालन—की समीक्षा बैठक में डीएम ने उर्वरक उपलब्धता, किसान सम्मान निधि, सिंचाई, कृषि प्रसंस्करण और नवाचार सहित विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की।बैठक में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया। डीएम ने उर्वरक उपलब्धता निगरानी एप के माध्यम से खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया को लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया।

किसानों को क्यूआर कोड के माध्यम से निर्धारित मूल्य पर उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया।उर्वरक के नमूना संग्रह की समीक्षा में जैव उर्वरक के नमूना संग्रह की उपलब्धि शून्य मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताई। सहायक निदेशक पौधा संरक्षण, सहायक निदेशक रसायन तथा अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों को दो दिनों के भीतर निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजने का निर्देश दिया गया। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों का शत-प्रतिशत ई-केवाईसी सत्यापन पूरा कराने का निर्देश प्रखंड कृषि पदाधिकारियों और कृषि समन्वयकों को दिया गया।

सिंचाई व्यवस्था की समीक्षा में विभागीय सुस्ती भी सामने आई। अकार्यरत नलकूपों की स्थिति और उनके बंद रहने के कारणों की स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई। वहीं लघु सिंचाई विभाग की उद्वह सिंचाई योजना की महज 4.8 प्रतिशत प्रगति को असंतोषजनक बताते हुए संबंधित कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा गया।डीएम ने कृषि उपज को सिर्फ कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। टमाटर, आलू, प्याज और मौसमी फलों के उत्पादक प्रखंडों को चिह्नित कर छोटी प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कराने का निर्देश दिया गया। टमाटर से केचप, सॉस, पाउडर और प्यूरी, आलू से चिप्स-नमकीन तथा प्याज से प्याज पाउडर तैयार करने की संभावनाओं पर काम करने को कहा गया।

किसानों को किसान उत्पादक संगठन से जोड़कर सामूहिक खरीद-बिक्री के जरिए बेहतर बाजार और मूल्य उपलब्ध कराने की रणनीति पर भी जोर दिया गया। इसके लिए उत्पादक क्षेत्रों में किसान समूह और फसल आधारित समूह बनाने का निर्देश जिला उद्यान पदाधिकारी को दिया गया।जगदीशपुर राजवाहा की सफाई की स्पष्ट जानकारी नहीं देने तथा डुमरांव लाइन में अपेक्षाकृत कम पानी उपलब्ध कराने के मामले में भी संबंधित अभियंताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया। वहीं आत्मा के उप परियोजना निदेशक को नवाचार आधारित खेती करने वाले किसानों के खेतों का भ्रमण अन्य किसानों को कराने तथा प्रशिक्षण प्राप्त किसानों को अपनी खेती में नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया। अंत में डीएम ने पूर्व बैठकों के सभी निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन और तय समय में कार्य पूरा करने की सख्त हिदायत दी।

