--डीएम साहिला ने छोटका नुआंव पहुंचकर बांटीं मिठाइयां और दीप, वंचित परिवारों के चेहरों पर बिखेरी मुस्कान
--सामाजिक समानता, भाईचारे और सद्भाव का दिया संदेश

केटी न्यूज/बक्सर।
दीपावली की असली सार्थकता तब पूरी होती है, जब खुशियों की रोशनी समाज के हर घर तक पहुंचे और कोई भी परिवार त्योहार की उमंग से अछूता न रहे। इसी भावना को धरातल पर उतारते हुए बक्सर जिला प्रशासन ने इस बार दीपावली को सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदना का उत्सव बना दिया। महादलित बस्तियों में पहुंचकर अधिकारियों ने न केवल दीप और मिठाइयां बांटीं, बल्कि परिवारों के साथ समय बिताकर उन्हें यह एहसास कराया कि समाज की खुशियों में हर व्यक्ति की बराबर हिस्सेदारी है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर आयोजित इस विशेष पहल के तहत रविवार को जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी महादलित परिवारों के बीच पहुंचे। इस दौरान जिलाधिकारी श्रीमती साहिला, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) निहारिका छवि और अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह ने अलग-अलग महादलित बस्तियों में पहुंचकर लोगों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं।

__छोटका नुआंव में डीएम ने परिवारों के बीच बिताए पल
बक्सर प्रखंड के छोटका नुआंव स्थित महादलित बस्ती में जिलाधिकारी श्रीमती साहिला स्वयं पहुंचीं। उनके आगमन से बस्ती के लोगों में उत्साह और प्रसन्नता का माहौल देखने को मिला। डीएम ने वहां रहने वाले परिवारों को दीप और मिठाइयां भेंट कीं तथा उनसे आत्मीय बातचीत की। अधिकारियों को अपने बीच पाकर परिवारों के चेहरे पर खुशी और अपनत्व का भाव नजर आया।यह महज उपहार बांटने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज के उन परिवारों के साथ खुशियों का रिश्ता जोड़ने की कोशिश थी, जिन तक अक्सर बड़े आयोजनों की चमक सीमित रूप में ही पहुंच पाती है। जिलाधिकारी ने बच्चों और परिवारों के बीच पहुंचकर त्योहार की शुभकामनाएं दीं और उनकी खुशियों में सहभागी बनीं।

__दीपावली केवल रोशनी नहीं, रिश्तों को जोड़ने का पर्व : डीएम
इस अवसर पर जिलाधिकारी साहिला ने कहा कि दीपावली का अर्थ केवल घरों में दीप जलाना और सजावट करना नहीं है। यह प्रेम, सद्भाव, समानता और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने वाला पर्व है। त्योहार की वास्तविक खुशी तभी है, जब समाज के प्रत्येक वर्ग तक उसका उल्लास पहुंचे और हर व्यक्ति स्वयं को इस उत्सव का हिस्सा महसूस करे।उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल विचारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे अपने व्यवहार और कार्यों में भी उतारना जरूरी है। एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होना और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करना ही ऐसे पर्वों का वास्तविक उद्देश्य है।जिलाधिकारी ने इस मौके पर जिलेवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। साथ ही लोगों से सुरक्षित, स्वच्छ और सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की अपील की।

--प्रशासनिक पहल ने दिया बराबरी और अपनत्व का संदेश
जिला प्रशासन की इस पहल का संदेश बस्ती में दीप जलाने और मिठाइयां बांटने तक सीमित नहीं रहा। इसने समाज को यह याद दिलाया कि खुशियां किसी जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होतीं। जब प्रशासन के अधिकारी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों के बीच पहुंचते हैं, तो यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन और मानवीय जुड़ाव की तस्वीर भी बनता है।दीपावली के इस अवसर पर महादलित परिवारों के साथ खुशियां साझा कर जिला प्रशासन ने सामाजिक दूरी को कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और भाईचारे की भावना मजबूत करने का संदेश दिया।




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