नहर पर जानलेवा जुगाड़ के सहारे पढ़ने जाते थे पांच गांवों के बच्चे, बिजली का खंभा टूटते ही सड़क पर उतरे विद्यार्थी

सरकारी योजनाओं की फाइलों में विकास के दावे भले ही किए जाते हों, लेकिन इटाढ़ी प्रखंड के मनोहरपुर गांव के सामने नहर पर अधूरी पड़ी पुलिया व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। करीब 17 साल से पुलिया निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे पांच गांवों के विद्यार्थियों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं।

नहर पर जानलेवा जुगाड़ के सहारे पढ़ने जाते थे पांच गांवों के बच्चे, बिजली का खंभा टूटते ही सड़क पर उतरे विद्यार्थी

__  2016 में ढलाई के दौरान ढह गई थी निर्माणाधीन पुलिया, 2007 में शुरू हुआ था काम; 26 लाख रुपये की योजना के बावजूद आवागमन का संकट बरकरार

केटी न्यूज/बक्सर।

सरकारी योजनाओं की फाइलों में विकास के दावे भले ही किए जाते हों, लेकिन इटाढ़ी प्रखंड के मनोहरपुर गांव के सामने नहर पर अधूरी पड़ी पुलिया व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। करीब 17 साल से पुलिया निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे पांच गांवों के विद्यार्थियों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। नहर पार करने के लिए ग्रामीणों ने किसी तरह बिजली के खंभे डालकर अस्थायी रास्ता बनाया था, लेकिन गुरुवार की शाम खंभा टूटने के बाद स्कूल जाने का यह खतरनाक सहारा भी खत्म हो गया। नतीजतन, शुक्रवार को आक्रोशित विद्यार्थियों ने बक्सर-सिकरौल नहर मार्ग जाम कर अपना विरोध जताया और प्रशासन से पुलिया निर्माण पूरा कराने की मांग की।

__2007 में शुरू हुआ काम, नौ साल बाद ढलाई में ढह गई पुलिया

ग्रामीणों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुलिया निर्माण योजना के तहत वर्ष 2007 में लगभग 26 लाख रुपये की लागत से पुलिया बनाने का काम शुरू हुआ था। उम्मीद थी कि पुलिया बनने से नहर के उस पार स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय नारायणपुर मनोहरपुर तक पहुंचना आसान हो जाएगा। लेकिन निर्माण कार्य वर्ष 2016 में उस समय बड़ा झटका खा गया, जब ढलाई के दौरान ही निर्माणाधीन पुलिया धराशायी हो गई। इसके बाद से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इतने लंबे समय में न पुलिया तैयार हुई और न ही विद्यार्थियों के आवागमन की स्थायी व्यवस्था बन सकी।ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक ने गंभीरता दिखाई होती, तो आज बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जोखिम भरा रास्ता नहीं अपनाना पड़ता।

__खंभों के सहारे पार करते थे नहर, अब वह रास्ता भी टूटा

नहर के दूसरी तरफ स्थित विद्यालय में मनोहरपुर सहित पांच गांवों के बच्चे पढ़ने जाते हैं। पुलिया के अभाव में ग्रामीणों ने बिजली के खंभे डालकर किसी तरह आने-जाने का रास्ता बनाया था। यह अस्थायी व्यवस्था शुरू से ही जोखिम भरी थी। ग्रामीणों के अनुसार, इस रास्ते से गुजरते समय कई विद्यार्थी नहर में गिर चुके हैं। गुरुवार को खंभा टूटने से कुछ लोगों के चोटिल होने की भी सूचना है। अब रास्ता बंद होने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

__जनप्रतिनिधियों से गुहार भी नहीं आई काम

स्थानीय ग्रामीण मुकेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि इस समस्या को लेकर पूर्व विधायक विश्वनाथ राम, तत्कालीन सांसद अश्विनी कुमार चौबे और वर्तमान विधायक संतोष कुमार निराला से कई बार गुहार लगाई गई। इसके बावजूद पुलिया निर्माण का मामला अब तक अधर में है। शुक्रवार को विद्यार्थियों का सड़क जाम इसी लंबे इंतजार और लगातार बढ़ती परेशानी का नतीजा रहा।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अधूरे निर्माण की स्थिति की जांच कराई जाए और पुलिया का काम जल्द पूरा कराया जाए। सवाल यह है कि जिस पुलिया का निर्माण बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए होना था, उसके अधूरे रहने की कीमत आखिर कब तक पांच गांवों के विद्यार्थी चुकाते रहेंगे?