__ फसल एनुटी, आरजी मजदूरी में बढ़ोतरी और पौनी को 1000 दिनों की मजदूरी के बराबर एकमुश्त भुगतान की मांग; सांसद सुधाकर सिंह की मौजूदगी में आंदोलन तेज करने का ऐलान

केटी न्यूज/बक्सर।
चौसा स्थित एसटीपीएल थर्मल पावर प्लांट से प्रभावित किसानों और खेतिहर मजदूरों ने अब अपने हक और लंबित मांगों को लेकर निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। लंबे समय से लंबित मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से प्रभावित लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी नाराजगी के बीच गुरुवार को आयोजित बैठक में आंदोलन को व्यापक रूप देने का फैसला लिया गया। बैठक में दो टूक चेतावनी दी गई कि यदि 30 नवंबर तक प्लांट प्रबंधन ने मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की तो एसटीपीएल प्लांट का संपूर्ण कार्य शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकालीन बंद कराया जाएगा। इस चेतावनी से प्लांट प्रबंधन और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

बैठक में प्रभावित किसानों और खेतिहर मजदूरों के आर्थिक अधिकारों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जिन किसानों और मजदूरों की जमीन, आजीविका और रोजगार प्लांट परियोजना से प्रभावित हुए हैं, उन्हें निर्धारित लाभ और उचित भुगतान मिलना चाहिए। इसके लिए मुख्य रूप से तीन मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। इनमें प्रभावित किसानों को फसल एनुटी का भुगतान, आरजी (आर एंड आर) मजदूरों की मजदूरी में बढ़ोतरी तथा पौनी को 1000 दिनों की मजदूरी के बराबर राशि एकमुश्त जोड़कर भुगतान करना शामिल है।बैठक का संचालन अश्विनी कुमार चौबे ने किया, जबकि अध्यक्षता रामनारायण राय ने की। इसमें सांसद सुधाकर सिंह समेत कई वक्ताओं ने प्रभावित किसानों और खेतिहर मजदूरों को संबोधित किया।

सांसद सुधाकर सिंह ने आरजी मजदूरों के भुगतान में वृद्धि के मुद्दे पर कहा कि इस संबंध में आरएनआर की बैठक में प्रस्ताव रखा गया था। जल्द ही आरजी की राशि बढ़ाकर भुगतान कराने की दिशा में पहल की जाएगी।वक्ताओं ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय किसानों और मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। परियोजना से प्रभावित परिवारों को उनका वाजिब हक दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों को लेकर अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि समय सीमा के भीतर ठोस निर्णय और भुगतान सुनिश्चित करना होगा।

बैठक में संगठनात्मक एकजुटता पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने किसानों और मजदूरों से आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने तथा अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने की अपील की। 30 नवंबर की समय सीमा तय किए जाने के बाद आंदोलन को लेकर क्षेत्र में सरगर्मी बढ़ने की संभावना है।बैठक में बृजेश राय, जय मंगल पांडेय, नरेंद्र तिवारी, सुरेश सिंह, ममता देवी, रामप्रवेश सिंह, मुन्ना तिवारी, शैलेश राय, पीयूष कुमार सिंह, हरिश्चंद्र प्रसाद, भोला सिंह, अजय सिंह, अशोक कुमार, दिनेश जी और शिवशंकर सिंह समेत बड़ी संख्या में प्रभावित किसान एवं मजदूर मौजूद रहे।





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