मीरा की भक्ति ने मोहा मन, कैकेयी-मंथरा संवाद ने झकझोरा हृदय
बक्सर के ऐतिहासिक किला मैदान में आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दौरान भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में विशाल रामलीला मंच पर दिन में श्रीकृष्ण लीला के अंतर्गत मीरा चरित्र भाग-2 का भावपूर्ण मंचन हुआ, जबकि देर रात रामलीला में कैकेयी-मंथरा संवाद एवं कैकेयी अंतर्द्वंद्व प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।


__ किला मैदान में आस्था, प्रेम और वचन की मर्यादा का जीवंत चित्रण, श्रीराम के वनगमन की पृष्ठभूमि ने दर्शकों को किया भावुक
केटी न्यूज/बक्सर।
बक्सर के ऐतिहासिक किला मैदान में आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दौरान भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में विशाल रामलीला मंच पर दिन में श्रीकृष्ण लीला के अंतर्गत मीरा चरित्र भाग-2 का भावपूर्ण मंचन हुआ, जबकि देर रात रामलीला में कैकेयी-मंथरा संवाद एवं कैकेयी अंतर्द्वंद्व प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्री बालकृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दोनों प्रसंगों को जीवंत बना दिया। संपूर्ण मंचन का निर्देशन स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज ने किया।

__ कृष्ण प्रेम में लीन मीरा की अटूट भक्ति ने बांधा समां
दिन में मंचित मीरा चरित्र भाग-2 में मीराबाई के अनन्य कृष्ण प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार मीरा सांसारिक मोह-माया, पारिवारिक दबाव और सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर अपने आराध्य गिरधर गोपाल को ही जीवन का सर्वस्व मानती हैं। भावपूर्ण अभिनय और भक्तिमय भजनों ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया। मीरा के चरित्र के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्ची भक्ति परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती, बल्कि विश्वास और समर्पण से ही भक्त और भगवान का संबंध मजबूत होता है।

__ मंथरा की कुटिल सलाह से बदली अयोध्या की तस्वीर
देर रात रामलीला के मंच पर अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच मंथरा द्वारा कैकेयी के मन में संदेह पैदा करने का प्रसंग सामने आया। मंथरा कैकेयी को उनके दो पुराने वरदानों की याद दिलाते हुए भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगने के लिए उकसाती है। उसकी बातों में आकर कैकेयी कोपभवन चली जाती हैं और महाराज दशरथ से अपने दोनों वरदान मांग लेती हैं।कैकेयी की मांग सुनकर महाराज दशरथ गहरे सदमे में पड़ जाते हैं। एक ओर पुत्र श्रीराम के प्रति उनका अपार स्नेह और दूसरी ओर रघुकुल की वचन परंपरा उन्हें भीतर तक विचलित कर देती है। कलाकारों ने कैकेयी के मन में आए बदलाव, मंथरा की भूमिका और दशरथ की विवशता को मार्मिक अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया। इस प्रसंग ने श्रीराम के वनगमन की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए दर्शकों को भावुक कर दिया।

__आस्था और मर्यादा का संदेश
श्री रामलीला समिति के संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने कहा कि रामलीला और कृष्णलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आदर्शों और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। मीरा का चरित्र अटूट भक्ति और समर्पण की प्रेरणा देता है, जबकि कैकेयी-मंथरा संवाद विवेकहीन निर्णयों के दूरगामी परिणामों तथा वचन की मर्यादा का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

