छह दशक से अधिक पुरानी परंपरा, ठोरी पांडेयपुर में हनुमान मंदिर का वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न

ठोरी पांडेयपुर गांव में आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रखंड के इस गांव में सोमवार को श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर स्थित हनुमान मंदिर का वार्षिकोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की सुगंध और बजरंगबली के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।

छह दशक से अधिक पुरानी परंपरा, ठोरी पांडेयपुर में हनुमान मंदिर का वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न

__ 1962 में हुई थी मंदिर की स्थापना, शरद पूर्णिमा पर हर साल जुटते हैं श्रद्धालु; पूजा-अर्चना, हवन और आरती के बीच गूंजे जय बजरंगबली के जयकारे

केटी न्यूज/चौगाईं।

ठोरी पांडेयपुर गांव में आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रखंड के इस गांव में सोमवार को श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर स्थित हनुमान मंदिर का वार्षिकोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की सुगंध और बजरंगबली के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने संकटमोचन हनुमान जी के समक्ष मत्था टेका और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की।

__ 1962 से चली आ रही है वार्षिकोत्सव की परंपरा

इस आयोजन की खासियत मंदिर से जुड़ी इसकी पुरानी परंपरा है। ग्रामीणों के अनुसार, हनुमान मंदिर की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी। करीब छह वर्ष पूर्व मंदिर का वैदिक विधि-विधान से जीर्णोद्धार कराया गया था। इसके साथ ही मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई थी। स्थापना काल से ही अश्विन मास की शरद पूर्णिमा के अवसर पर यहां वार्षिक पूजा-अर्चना आयोजित करने की परंपरा चली आ रही है। समय के साथ यह आयोजन गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इस वर्ष भी ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा का निर्वहन किया।

__ मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान

वार्षिकोत्सव को लेकर मंदिर परिसर की आकर्षक सजावट की गई थी। सुबह से ही पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। पंडित अंकुश उपाध्याय, पंडित बृजकिशोर पांडेय, धर्मदेव पांडेय और उमेश कुमार पांडेय सहित अन्य लोगों ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा, हवन और आरती संपन्न कराई गई। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ शामिल रहे। हनुमान जी के जयघोष से वातावरण लगातार गूंजता रहा।

__ प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन

पूजा-अर्चना और हवन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। सामूहिक आरती के साथ वार्षिकोत्सव का समापन हुआ। आयोजन में ग्रामीणों की भागीदारी ने उत्सव को खास बना दिया। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल लोगों की आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि आपसी प्रेम, सामाजिक एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं। परंपरा और भक्ति से जुड़ा यह वार्षिकोत्सव गांव में धार्मिक उत्साह की छाप छोड़ गया।