शिवमय हुआ चरित्रवन: आदिनाथ अखाड़ा में पांच दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य शुभारंभ

चरित्रवन स्थित श्री आदिनाथ अखाड़ा शनिवार को पूरी तरह शिवमय नजर आया, जब गुरुदेव भगवान श्रीनाथ बाबा जी के प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव के अवसर पर पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का भव्य शुभारंभ हुआ। “ॐ नमः शिवाय” मंत्रोच्चार, शिव कीर्तन, महारुद्राभिषेक और आध्यात्मिक प्रवचनों से वातावरण भक्तिरस में डूब गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ अखाड़ा परिसर में उमड़ पड़ी और पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति व उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

शिवमय हुआ चरित्रवन: आदिनाथ अखाड़ा में पांच दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य शुभारंभ

__ महामंडलेश्वर योगी श्री शीलनाथजी महाराज ने सुनाई ज्योतिर्लिंगों की महिमा, भजन-कीर्तन से गूंजा पूरा परिसर

केटी न्यूज/बक्सर

चरित्रवन स्थित श्री आदिनाथ अखाड़ा शनिवार को पूरी तरह शिवमय नजर आया, जब गुरुदेव भगवान श्रीनाथ बाबा जी के प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव के अवसर पर पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का भव्य शुभारंभ हुआ। “ॐ नमः शिवाय” मंत्रोच्चार, शिव कीर्तन, महारुद्राभिषेक और आध्यात्मिक प्रवचनों से वातावरण भक्तिरस में डूब गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ अखाड़ा परिसर में उमड़ पड़ी और पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति व उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में महामंडलेश्वर योगी श्री शीलनाथजी महाराज ने भक्तों को भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा सुनाई।

अपने ओजस्वी प्रवचन में उन्होंने सोमनाथ और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथाओं का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।उन्होंने बताया कि गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम और अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें श्रापमुक्त किया, तभी से यह स्थान आस्था का महान केंद्र बन गया।इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा सुनाई।

महाराज ने कहा कि जब भगवान कार्तिकेय और गणेश के बीच पृथ्वी की परिक्रमा की शर्त लगी, तब कार्तिकेय पूरी पृथ्वी की यात्रा पर निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा कर विजय प्राप्त कर ली। इससे नाराज होकर कार्तिकेय पर्वत पर चले गए। उन्हें मनाने भगवान शिव और माता पार्वती वहां पहुंचे और ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। यही स्थान आज मल्लिकार्जुन महादेव के रूप में प्रसिद्ध है।प्रवचन के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते रहे। वहीं भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत शिव भजनों ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। “हर हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, कथा, सत्संग, भजन संध्या और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम चलेगा। दूर-दराज से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही चरित्रवन का श्री आदिनाथ अखाड़ा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है, जहां हर ओर शिवभक्ति की अलौकिक छटा बिखरी हुई है।