जीतिया व्रत की तिथि पर विद्वानों में बनी सहमति, 4 अक्टूबर को व्रत और 5 को पारण

जीवित्पुत्रिका (जीतिया) व्रत की तिथि को लेकर बक्सर के विद्वानों ने शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। श्रीराम रेखाघाट स्थित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में सिद्धाश्रम धाम बक्सर के विद्वानों की बैठक हुई। इसमें गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से 4 अक्टूबर 2026, रविवार को जीवित्पुत्रिका व्रत करने तथा 5 अक्टूबर, सोमवार को सूर्योदय के बाद पारण करने का निर्णय लिया गया।

जीतिया व्रत की तिथि पर विद्वानों में बनी सहमति, 4 अक्टूबर को व्रत और 5 को पारण

__ बक्सर के रामेश्वरनाथ मंदिर में जुटे विद्वानों ने पंचांगों में दी गई तिथि पर उठाए सवाल, शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर 3 अक्टूबर के व्रत को बताया अनुचित

केटी न्यूज/बक्सर।

जीवित्पुत्रिका (जीतिया) व्रत की तिथि को लेकर बक्सर के विद्वानों ने शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। श्रीराम रेखाघाट स्थित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में सिद्धाश्रम धाम बक्सर के विद्वानों की बैठक हुई। इसमें गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से 4 अक्टूबर 2026, रविवार को जीवित्पुत्रिका व्रत करने तथा 5 अक्टूबर, सोमवार को सूर्योदय के बाद पारण करने का निर्णय लिया गया।बैठक में विद्वानों ने पंचांगों में निर्धारित तिथि और उसमें दी गई टिप्पणियों पर चर्चा करते हुए कहा कि व्रत की तिथि निर्धारित करते समय जीवित्पुत्रिका व्रत कथा में वर्णित विधि-निषेध को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। विद्वानों के अनुसार 3 अक्टूबर को सप्तमी विद्ध अष्टमी होने के कारण उस दिन व्रत करना शास्त्रीय निर्देशों के अनुरूप नहीं होगा।

बैठक में बताया गया कि 3 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहेगी और सुबह 9:54 बजे तक सप्तमी के बाद अष्टमी का प्रवेश होगा। ऐसे में विद्वानों ने जीवित्पुत्रिका व्रत कथा में वर्णित “वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमी सहिताष्टमी” के आधार पर 3 अक्टूबर को व्रत से बचने की बात कही।वहीं, 4 अक्टूबर को सूर्योदय अष्टमी तिथि में होगा। सूर्योदय सुबह 6:08 बजे तथा अष्टमी तिथि सुबह 7:28 बजे तक रहने की जानकारी बैठक में दी गई। विद्वानों ने व्रत कथा में वर्णित नियम का हवाला देते हुए कहा कि सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहने पर उसी दिन जीवित्पुत्रिका व्रत किया जाना चाहिए। इसी आधार पर 4 अक्टूबर की तिथि को उपयुक्त माना गया।

__दशमी में पारण को लेकर भी हुआ मंथन

बैठक में व्रत के पारण को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। कुछ विद्वानों ने सवाल उठाया कि 5 अक्टूबर को सूर्योदय के समय दशमी तिथि रहेगी, जबकि कुछ पंचांगों में नवमी में ही पारण की विधि बताई गई है। इस पर निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, पराशर माधवीय, निर्णयामृत, स्मृति मुक्ताफल, गृह्य रत्नाकर, व्रतराज, शुद्ध कौमुदी और अन्य धर्मशास्त्रीय ग्रंथों के प्रमाणों का उल्लेख करते हुए विद्वानों ने कहा कि तिथि लोप की स्थिति में अगले दिन प्रातः पारण का विधान है। इसलिए 5 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद पारण करने में कोई दोष नहीं है, ऐसा बैठक में निष्कर्ष निकाला गया।

बैठक में डॉ. नारायण उपाध्याय, छबिनाथ त्रिपाठी, आचार्य कृष्णानंद पौराणिक, पं. नरोत्तम द्विवेदी, संजय शास्त्री, पुरुषोत्तम शास्त्री, पं. आदित्याचार्य, पं. मनोज शास्त्री, पं. रामप्रवेश चौबे, पं. विनय चतुर्वेदी सहित अन्य विद्वान मौजूद रहे। आचार्य धनजी चतुर्वेदी व्यक्तिगत कारणों से बैठक में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने व्रत निर्णय पर अपनी सहमति प्रदान की।विद्वानों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जीवित्पुत्रिका व्रत के संबंध में शास्त्रीय विधि और तिथि का ध्यान रखते हुए 4 अक्टूबर को व्रत तथा 5 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद पारण करें।