__ कृत्रिम छठ घाट पर छात्राओं ने पारंपरिक विधि से भगवान भास्कर को अर्पित किया अर्घ्य, निदेशक तारकेश्वर सिंह ने शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति से जुड़ने का दिया संदेश
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।
बिहार की लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक छठ महापर्व की मनोहारी झलक शुक्रवार को ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल, बगेन गोला के परिसर में देखने को मिली। विद्यालय में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ छठ महापर्व मनाया गया। इस दौरान परिसर में बनाए गए कृत्रिम छठ घाट पर छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में छठ गीतों की मधुर धुन के बीच भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। पूजा की पारंपरिक व्यवस्था और लोकगीतों से पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय हो उठा।कार्यक्रम का संचालन साक्षी ओझा ने प्रभावशाली अंदाज में किया। वहीं नवम वर्ग की छात्रा सृष्टि के नेतृत्व में आरजू, आस्था, अदिति, अनामिका, मीठी, माही, सलोनी, इक्षा, शुभांशु, राहुल, मासूम समेत अन्य छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति और छठ की परंपराओं को जीवंत कर दिया।इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक तारकेश्वर सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान और अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कारवान बनाना तथा अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि छठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, त्याग, तपस्या, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का महापर्व है। बिहार की यह अनूठी परंपरा हमें उगते और डूबते दोनों सूर्य का सम्मान करना सिखाती है।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझती है और अपनी विरासत के प्रति गर्व महसूस करती है। विद्यालय में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सांस्कृतिक चेतना को निखारने पर विशेष जोर दिया जाता है।

आयोजन को सफल बनाने में शिक्षक संजय शुक्ला, उज्ज्वल, मनीष ओझा, गन्नू भारद्वाज, राकेश, रामप्रवेश, अजय पांडेय, रंजन, अखिलेश, पवन, धनजी, ओमप्रकाश, चंदन, अनिल ओझा और रामेश्वर ओझा सहित अन्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं शिक्षिकाओं सना परवीन, चांदनी, तृप्ति, दीप्ति, ममता, रिया और गायत्री ने भी सक्रिय योगदान दिया। विद्यालय के नॉन टीचिंग स्टाफ ने भी आयोजन में सहयोग किया।यह आयोजन बच्चों को अपनी मिट्टी, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की एक सराहनीय पहल साबित हुआ।




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