__ पाथवेज वर्ल्ड स्कूल में दीपोत्सव की धूम, रंगोली प्रतियोगिता में छात्राओं ने बिखेरे रचनात्मकता के रंग; ज्ञान का दीप जलाकर समाज से अज्ञानता दूर करने का आह्वान
केटी न्यूज/डुमरांव।
दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि रचनात्मकता, सहयोग और सामाजिक सरोकारों को जीवन में उतारने का भी अवसर है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए शुक्रवार को धनतेरस के अवसर पर डुमरांव के पूर्वी गुमटी के समीप स्थित पाथवेज वर्ल्ड स्कूल में दीपोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए रंगोली के आकर्षक रंगों से विद्यालय परिसर को उत्सवी रंग में रंग दिया। वहीं, हस्तनिर्मित दीये, कलश और घरों की सजावट के सामान बनाकर पर्यावरण अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने तथा स्वदेशी कला को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में छात्राओं ने अलग-अलग रंगों और डिजाइनों से मनमोहक रंगोलियां बनाईं। वहीं बच्चों ने अपने हाथों से दीप, कलश और सजावट की अन्य सामग्रियां तैयार कर यह संदेश दिया कि बाजार में मिलने वाली सजावटी वस्तुओं के साथ घर में बनाई गई हस्तनिर्मित सामग्री से भी दीपावली को खास बनाया जा सकता है। बच्चों की रचनात्मकता और उत्साह ने आयोजन को यादगार बना दिया।इस मौके पर इंजीनियर आर. राघवन ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली के अवसर पर केवल घरों में ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी शिक्षा और ज्ञान का दीप प्रज्वलित करना चाहिए। ज्ञान की रोशनी से व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ पूरे समाज को प्रकाशित कर सकता है।

उन्होंने बच्चों से अपने जीवन से अज्ञानता का अंधकार दूर करने और शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाने का आह्वान किया।वहीं, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नेहा सिंह ने दीपावली के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए त्योहार को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि दीपावली पर अपने घरों को रोशन करने के साथ किसी जरूरतमंद और असहाय व्यक्ति के जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचाना चाहिए। उन्होंने बच्चों को एक दीप मदद और सहयोग के नाम जलाने का संदेश दिया, ताकि त्योहार की खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी बच्चों और अभिभावकों को दीपावली की शुभकामनाएं दी गईं। पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल रहा। बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि त्योहारों के माध्यम से उनमें रचनात्मकता, सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित की जा सकती है।





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