व्हीलचेयर ने खोली आर्यन की ‘बंद दुनिया’, अब सहारे से नहीं अपने दम पर सफर

दिव्यांगता ने जिंदगी की रफ्तार जरूर थाम दी थी, लेकिन हौसले को नहीं। हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाले नया भोजपुर निवासी आर्यन कुमार को जब व्हीलचेयर मिली तो उनके लिए यह महज एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता नया कदम बन गया।

व्हीलचेयर ने खोली आर्यन की ‘बंद दुनिया’, अब सहारे से नहीं अपने दम पर सफर

__ दोनों हाथ-पैर से प्रभावित दिव्यांगता के चलते दूसरों पर थे निर्भर, संबल योजना से मिली नई गतिशीलता

केटी न्यूज/बक्सर।

दिव्यांगता ने जिंदगी की रफ्तार जरूर थाम दी थी, लेकिन हौसले को नहीं। हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाले नया भोजपुर निवासी आर्यन कुमार को जब व्हीलचेयर मिली तो उनके लिए यह महज एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता नया कदम बन गया। ‘संबल योजना’ के तहत जिला प्रशासन की पहल से मिली इस सहायता ने आर्यन की रोजमर्रा की जिंदगी को काफी हद तक आसान कर दिया है।नया भोजपुर निवासी चन्द्र विजय कुमार के पुत्र आर्यन कुमार दोनों हाथों और दोनों पैरों से प्रभावित दिव्यांगता के कारण स्वयं आवागमन करने में कठिनाई महसूस करते थे। घर के बाहर निकलने से लेकर दैनिक जरूरतों तक उन्हें परिजनों अथवा दूसरों के सहारे की जरूरत पड़ती थी।

ऐसे में व्हीलचेयर मिलने के बाद उनकी आवाजाही की मुश्किलें कम हुई हैं और अब वे पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता के साथ आवागमन कर पा रहे हैं।जिला प्रशासन, बक्सर के निर्देशन में 24 सितंबर को बुनियाद केंद्र, डुमरांव के माध्यम से आर्यन को निःशुल्क व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई। सहायता मिलने के बाद आर्यन के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। उन्होंने कहा कि हाथ-पैर से प्रभावित होने के कारण उन्हें हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। व्हीलचेयर मिलने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे उनकी बंद दुनिया के दरवाजे खुल गए हों। अब वे अपनी आवाजाही खुद कर सकते हैं।

__ सहायता से स्वावलंबन की ओर

‘संबल योजना’ के माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आर्यन को मिली व्हीलचेयर इसी पहल की एक तस्वीर है। सही समय पर मिला छोटा-सा सहारा किसी दिव्यांग व्यक्ति के लिए आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की बड़ी वजह बन सकता है।जिला प्रशासन की ओर से दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास जारी हैं। आर्यन की कहानी इस बात की मिसाल है कि जरूरत के अनुरूप संसाधन और सहयोग मिले तो दिव्यांगता के बावजूद जीवन को अधिक सहज और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।