कतिकन्नार पंचायत में नल-जल मेंटेनेंस पर 9.11 लाख खर्च, फिर भी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा पानी
प्रखंड के कतिकन्नार पंचायत में वर्ष 2021 से 2023 के बीच 15वीं वित्त आयोग मद से नल-जल योजना के मेंटेनेंस के नाम पर कुल 9 लाख 11 हजार 520 रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। पंचायत के विभिन्न गांवों और वार्डों में इस राशि से मरम्मती कार्य, पाइप व नल बदलने तथा जलापूर्ति संचालन का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर दिखाई दे रही है।ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद पंचायत के कई वार्डों में आज भी नल-जल योजना का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है।
केटी न्यूज/केसठ ।
प्रखंड के कतिकन्नार पंचायत में वर्ष 2021 से 2023 के बीच 15वीं वित्त आयोग मद से नल-जल योजना के मेंटेनेंस के नाम पर कुल 9 लाख 11 हजार 520 रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। पंचायत के विभिन्न गांवों और वार्डों में इस राशि से मरम्मती कार्य, पाइप व नल बदलने तथा जलापूर्ति संचालन का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर दिखाई दे रही है।ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद पंचायत के कई वार्डों में आज भी नल-जल योजना का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। जहां कहीं मरम्मत हुई भी है, वह अधिकतर टूटी-फूटी पाइपों और कुछ नलों के बदलने तक सीमित रही।

ग्रामीणों का आरोप है कि भुगतान की गई राशि के अनुपात में काम नहीं हुआ, बल्कि काम कम और बाउचर अधिक बनाए गए हैं।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बाउचर में दर्शाई गई पाइपों और नलों की संख्या तथा मौके पर उपलब्ध सामग्री में स्पष्ट अंतर है। कई स्थानों पर बाउचर में दर्ज कार्य दिखाई नहीं देते, जिससे मेंटेनेंस के नाम पर अनियमितता की आशंका गहराती जा रही है। हालांकि, कुछ ग्रामीणों ने यह स्वीकार किया कि पहले जिन इलाकों में पानी नहीं आता था, वहां अब आपूर्ति शुरू हुई है, लेकिन इसे वे आंशिक सुधार ही मानते हैं।बताया जा रहा है कि वर्तमान में नल-जल योजना के मेंटेनेंस और संचालन की जिम्मेदारी पीएचईडी विभाग के पास है।

विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों से भी ग्रामीण पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। कई वार्डों में पानी का दबाव कम है तो कहीं नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है।ग्रामीणों की मांग है कि 2021 से 2023 तक खर्च की गई पूरी राशि की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, बाउचर और भौतिक सत्यापन का मिलान हो तथा दोषी पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, नल-जल योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर हर घर तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी योजना का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

