__ उपकरणों की सूची सौंपने के साथ मशीनों का कराया गया मिलान, अस्पताल प्रशासन ने नियमित सेवा शुरू करने का दिया भरोसा; अब मरीजों को धरातल पर सुविधा मिलने का इंतजार
केटी न्यूज/डुमरांव।
डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में फिजियोथेरेपी की सुविधा बहाल करने को लेकर तीन दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को अस्पताल प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित हो गया। धरने के तीसरे दिन प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. शिव कुमार चौधरी ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को फिजियोथेरेपी उपकरणों की सूची उपलब्ध कराई और अस्पताल में मौजूद मशीनों का मिलान भी कराया। उन्होंने सभी मशीनों के इंस्टॉलेशन और चालू होने की जानकारी देते हुए अस्पताल में नियमित रूप से फिजियोथेरेपी सेवा संचालित करने का भरोसा दिया। प्रशासन के इस कदम के बाद आंदोलनकारियों ने फिलहाल अपना धरना स्थगित करने का निर्णय लिया।

हालांकि, धरना स्थगित होने के साथ ही अस्पताल में फिजियोथेरेपी सेवा शुरू होने का दावा भी अब चर्चा के केंद्र में है। असल सवाल यह है कि मशीनों के चालू होने की जानकारी मरीजों को नियमित और निर्बाध इलाज की सुविधा में कब तब्दील होती है। क्योंकि आंदोलन की मूल वजह भी यही थी कि लाखों रुपये के आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा था।गौरतलब है कि समाजसेवी हरेकृष्ण सिंह यादव के नेतृत्व में अस्पताल में फिजियोथेरेपी की नियमित सुविधा बहाल करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया था।

धरनार्थियों का आरोप था कि करीब एक वर्ष पूर्व अस्पताल को आधुनिक फिजियोथेरेपी मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं, लेकिन लंबे समय तक उनका विधिवत इंस्टॉलेशन नहीं कराया गया। नतीजतन, हड्डी, नस और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं से परेशान मरीजों को सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हो सकने वाली इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा था।आंदोलनकारियों ने अस्पताल प्रशासन से उपकरणों की पूरी सूची सार्वजनिक करने, मशीनों की उपलब्धता और उनकी स्थिति स्पष्ट करने तथा सभी उपकरणों को इंस्टॉल कर नियमित सेवा शुरू करने की मांग उठाई थी।

उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल में संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी है।बुधवार को प्रभारी उपाधीक्षक की पहल के बाद उपकरणों की सूची मिलने और मशीनों का मिलान होने से धरनार्थियों ने आंदोलन को फिलहाल विराम दे दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि धरना स्थगित करने का अर्थ मांगों से पीछे हटना नहीं है। फिजियोथेरेपी सेवा का नियमित संचालन और मरीजों को इसका वास्तविक लाभ मिलना ही आंदोलन की सफलता का पैमाना होगा। अब देखना यह है कि अस्पताल प्रशासन अपना आश्वासन कितनी तत्परता से पूरा करता है।





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