__ ‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’ पर सतत विकास के लिए सामूहिक भागीदारी का आह्वान, पानी की बर्बादी रोकने और पौधों के संरक्षण पर दिया गया जोर
केटी न्यूज/बक्सर।
जल संरक्षण और हरियाली का विस्तार केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। जनभागीदारी के जरिए ही पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है। इसी संदेश के साथ मंगलवार को समाहरणालय परिसर स्थित कार्यालय कक्ष में जिला जनसंपर्क कार्यालय के तत्वावधान में ‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीडीसी निहारिका छवि की उपस्थिति में जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘जल-जीवन-हरियाली : जन जागरूकता से सतत विकास की ओर सामूहिक पहल’ रहा। इस दौरान राज्य स्तरीय कार्यक्रम का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जलस्रोतों के संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया गया।वक्ताओं ने कहा कि जल और हरियाली का संरक्षण केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की बुनियाद है। तेजी से बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों, जल संकट और जैव विविधता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों के बीच सामूहिक प्रयासों की अहमियत और बढ़ गई है।

पर्यावरण संतुलन बनाए रखने तथा जीव-जंतुओं के अस्तित्व की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से पानी की बर्बादी रोकने, वर्षा जल संचयन को अपनाने तथा तालाब, पोखर, कुएं समेत पारंपरिक जलस्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने की अपील की गई। साथ ही पौधरोपण करने के बाद पौधों की नियमित देखभाल और उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया।प्रशासन ने लोगों से घर, विद्यालय, कार्यालय और पंचायत स्तर पर जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों और सामूहिक भागीदारी से बक्सर को स्वच्छ, हरा-भरा और जल-सुरक्षित जिला बनाया जा सकता है।





टिप्पणियां 0
टिप्पणी एडमिन की मंज़ूरी के बाद सबको दिखेगी। अभद्र भाषा का प्रयोग न करें।