हेमू की वीरगाथा से गूंजा डुमरांव, रौनियार समाज ने मनाया विजयोत्सव
शहीद पार्क स्थित सभागार में बुधवार को अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा, डुमरांव की ओर से भारतवर्ष के अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू साह का विजयोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान हेमू के अदम्य साहस, पराक्रम और देशभक्ति को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्ष को भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताया।

__ अंतिम हिंदू सम्राट की शौर्यगाथा को किया याद, नई पीढ़ी से वीरों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
केटी न्यूज/डुमरांव।
शहीद पार्क स्थित सभागार में बुधवार को अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा, डुमरांव की ओर से भारतवर्ष के अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू साह का विजयोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान हेमू के अदम्य साहस, पराक्रम और देशभक्ति को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्ष को भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संयोजक मोहन गुप्ता ने की, जबकि मंच संचालन सचिव केके गुप्ता ने किया। कोषाध्यक्ष विनय कुमार ने आगत अतिथियों एवं समाज के लोगों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष अजय गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हेमचंद्र विक्रमादित्य ऐसे वीर योद्धा थे, जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए भारत के स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके जीवन का संघर्ष आज भी साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।वक्ताओं ने बताया कि हेमू का जन्म वर्ष 1501 में राजस्थान के अलवर जिले में हुआ था। उनके पिता नमक का व्यापार करते थे, जिसके कारण उनका बचपन हरियाणा के रेवाड़ी में बीता। युवावस्था से ही उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में संघर्ष का रास्ता अपनाया। कहा गया कि हेमू ने अपने जीवनकाल में कुल 22 युद्ध लड़े और अधिकांश में विजय हासिल की।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 7 अक्टूबर 1556 को मानी जाती है, जब उन्होंने अकबर की सेना को पराजित कर दिल्ली की सत्ता पर अधिकार स्थापित किया। इसके बाद उन्हें ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि प्रदान की गई। हालांकि, 5 नवंबर 1556 को पानीपत की दूसरी लड़ाई में वे वीरतापूर्वक लड़ते हुए घायल होकर बेहोश हो गए और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए।वक्ताओं ने कहा कि हेमू का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और राष्ट्रप्रेम का संदेश है। ऐसे महापुरुषों के जीवन और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।मौके पर अजय गुप्ता, मनोज गुप्ता, राकेश कुमार, सिगाशान प्रसाद, पवन गुप्ता, विनोद गुप्ता, विश्वनाथ जी, उमेश गुप्ता, राजू गुप्ता, मनोज कुमार, रौशन गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में रौनियार समाज के लोग मौजूद रहे।

