नवरात्रि स्पेशल: स्वयं काल रावण भी यज्ञ के लिए मां विध्यवासनी धाम से मांगता था समय, विंध्यधरा से ज्योतिष गणना करता था रावण
लंकाधिपति रावण भी अपनी ज्योतिष गणित की गणना के लिए विंध्याचल की शरण में आता था। तब से अब तक विंध्य धरा का अमरावती चौराहे के पास का स्थल भारत के मानक समय को प्रभावित कर रहा है। यह स्थान भारत की प्रधान मध्याह्न रेखा 82.5 पूर्वी देशांतर पर स्थित है।

-मंदिर के समीप रावण ने बिंदेश्वर महादेव की स्थापना की थी
केटी न्यूज विध्याचल। पवन तिवारी
लंकाधिपति रावण भी अपनी ज्योतिष गणित की गणना के लिए विंध्याचल की शरण में आता था। तब से अब तक विंध्य धरा का अमरावती चौराहे के पास का स्थल भारत के मानक समय को प्रभावित कर रहा है। यह स्थान भारत की प्रधान मध्याह्न रेखा 82.5 पूर्वी देशांतर पर स्थित है। भारत का मानक समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) विंध्याचल से ही लिया जाता है। वर्ष 2007 में भूगोल विदों के एक दल ने यहां पहुंच कर विन्ध्याचल के अमरावती चौराहे के पास स्थित स्थल को मानक समय के स्थल को चिह्नित किया था।
सटीक भौगोलिक स्थिति के खोजकर्ता एसपीएसीई (साइज पाल्युराइजेशन एसोसिएशन आफ कम्यूनिकेट्स एंड एजूकेशन) हैं। विंध्याचल के आध्यात्मिक धर्म गुरु पं. त्रियोगी मिट्ठू मिश्र बताते हैं कि विंध्य धरा को मां बिंदुवासिनी का दरबार भी कहते हैं। महारानी मां बिंदुवासिनी अपनी संपूर्ण कलाओं के साथ यहां विद्यमान हैं।
बिंदु के बिना एक छोटी रेखा भी नहीं खींची जा सकती है और मां बिंदुवासिनी की कृपा के बिना सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। रावण भी अपनी ज्योतिष गणना के लिए समय यहीं से लिया करता था। यही नहीं रावण ने यहां मां के मंदिर के समीप शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसे बिंदेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है, जो आध्यात्मिक जगत के मानक समय का सूचक भी है।
मानक समय के पास खड़ा होना रोमांच से कम नहीं मिर्जापुर में बहुत से ऐसे स्थान हैं जिसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पुराणों में भी जिक्र है। इसमें मानक समय केंद्र भी है। जहां से भारत का समय निर्धारित होता है।