मुरली की तान पर मोहित हुए भक्त, शिव धनुष टूटते ही गूंजा जय श्रीराम

ऐतिहासिक किला मैदान में आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दौरान शुक्रवार को दिन में श्रीकृष्ण लीला की गोविंद शृंगार लीला और देर रात रामलीला के अंतर्गत फुलवारी, सीता स्वयंवर तथा धनुष यज्ञ के प्रसंगों का मनोहारी मंचन किया गया।

मुरली की तान पर मोहित हुए भक्त, शिव धनुष टूटते ही गूंजा जय श्रीराम

__ गोविंद शृंगार लीला में श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप ने बांधा समां, फुलवारी से सीता स्वयंवर तक भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर

केटी न्यूज/बक्सर।

ऐतिहासिक किला मैदान में आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दौरान शुक्रवार को दिन में श्रीकृष्ण लीला की गोविंद शृंगार लीला और देर रात रामलीला के अंतर्गत फुलवारी, सीता स्वयंवर तथा धनुष यज्ञ के प्रसंगों का मनोहारी मंचन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक छवि से लेकर भगवान श्रीराम के धनुष भंग तक के दृश्यों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय और भक्ति संगीत के बीच पूरा रामलीला परिसर जयघोष से गूंजता रहा।

मथुरा-वृंदावन से पधारे श्री बालकृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में गोविंद शृंगार लीला प्रस्तुत की। पीतांबर, मोर मुकुट, मस्तक पर तिलक, वनमाला और आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित भगवान श्रीकृष्ण का मनमोहक स्वरूप देखते ही बना। मधुर मुरली की धुन, मनोहारी नृत्य और संगीत ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। लीला के माध्यम से प्रेम, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया गया। श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

__ फुलवारी में राम-सीता का प्रथम मिलन

देर रात रामलीला में जनकपुर की फुलवारी का प्रसंग जीवंत हुआ। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से पुष्प लेने पहुंचे भगवान श्रीराम और माता सीता का प्रथम दर्शन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। दोनों के बीच मर्यादित प्रेम और सहज भावनाओं को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद माता सीता ने मां गौरी की पूजा कर श्रीराम को पति रूप में प्राप्त करने की कामना की। मां गौरी के आशीर्वाद के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

__ धनुष टूटते ही जय श्रीराम से गूंजा मैदान

सीता स्वयंवर में राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार अनेक राजा-महाराजाओं और पराक्रमी योद्धाओं ने शिव धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभी असफल रहे। इससे राजा जनक की चिंता बढ़ गई। अंततः गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़े और सहजता से शिव धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे। इसी दौरान धनुष के टूटने की गूंज के साथ पूरा मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर स्वयंवर की लीला को पूर्णता प्रदान की।दोनों लीलाओं में आकर्षक वेशभूषा, सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवाद और सुसज्जित मंच ने दर्शकों का मन मोह लिया। देर रात तक श्रद्धालु रामलीला का आनंद लेते रहे।श्री रामलीला समिति, बक्सर के संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने बताया कि विजयादशमी महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के आदर्शों, मर्यादा, प्रेम तथा भक्ति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।