नारायण नाम के जयघोष से गूंजा जवहीं जगदीशपुर, 501 कलशों की जलयात्रा से महायज्ञ का शुभारंभ
जवहीं जगदीशपुर गांव रविवार को पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जब 501 कलशों की भव्य जलयात्रा के साथ 21 कुंडीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। हर ओर “श्रीमन्नारायण-नारायण” के जयघोष, शंखध्वनि और हरिनाम संकीर्तन से पूरा इलाका आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। गांव की गलियां श्रद्धालुओं की भीड़, ध्वज-पताकाओं और भक्ति गीतों से सज उठीं।


--वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन और श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था; 24 मई तक चलेगा श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
जवहीं जगदीशपुर गांव रविवार को पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया, जब 501 कलशों की भव्य जलयात्रा के साथ 21 कुंडीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। हर ओर “श्रीमन्नारायण-नारायण” के जयघोष, शंखध्वनि और हरिनाम संकीर्तन से पूरा इलाका आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। गांव की गलियां श्रद्धालुओं की भीड़, ध्वज-पताकाओं और भक्ति गीतों से सज उठीं।श्री श्री 1008 गंगापुत्र त्रिदण्डी स्वामी जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस महायज्ञ की शुरुआत हरनाथपुरा पंचायत से निकली विशाल कलश यात्रा से हुई। हजारों की संख्या में शामिल महिलाएं सिर पर कलश धारण कर पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति भाव से आगे बढ़ती रहीं।

वहीं युवा टोली ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ यात्रा की शोभा बढ़ा रही थी।श्रद्धालुओं की यह यात्रा उधुरा घाट स्थित गोकुल जलाशय पहुंची, जहां वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच कलशों में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ जल लेकर यज्ञ मंडप पहुंचे। यात्रा के दौरान जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया।महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर स्वामी जी महाराज ने कहा कि कलियुग में भगवान नारायण का नाम ही सबसे बड़ा सहारा है। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के कल्याण का माध्यम है। यज्ञ से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानव जीवन में धर्म, संस्कार तथा शांति का भाव जागृत होता है।

उन्होंने लोगों से सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में भाईचारा और आध्यात्मिक चेतना मजबूत होती है। स्वामी जी के प्रवचन सुनने के लिए दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।महायज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में विनोदानंद चौबे, राजू राय, जितेंद्र कुमार चौबे, श्याम नारायण चौबे, हरे राम मिश्रा, बालेश्वर राय, रविंद्र राय, प्रेम शंकर राय, सिद्धनाथ राय, सोनू मिश्रा, कामेश्वर राय एवं अन्य श्रद्धालु पूजा-अर्चना और सेवा कार्य में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।यज्ञ समिति ने बताया कि 18 मई से प्रतिदिन वैदिक रीति से हवन-पूजन होगा। वहीं प्रत्येक शाम चार बजे से स्वामी जी महाराज द्वारा भक्ति रस कथा और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। 24 मई को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ महायज्ञ का समापन होगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

