आर्द्रा नक्षत्र के साथ बदलेगा मौसम का मिजाज, खेतों में बढ़ेगी हलचल, मंदिरों में गूंजेंगे पूजा-पाठ के स्वर
आगामी 22 जून की रात 8:27 बजे से आर्द्रा नक्षत्र का शुभारंभ होगा। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी की तैयारियां तेज होने लगेंगी। भारतीय कृषि परंपरा में आर्द्रा नक्षत्र को मानसून के आगमन और खरीफ फसलों की बुआई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। किसानों की मान्यता है कि इस नक्षत्र के दौरान होने वाली अच्छी वर्षा धान समेत अन्य खरीफ फसलों के लिए लाभकारी साबित होती है।

केटी न्यूज/डुमरांव
आगामी 22 जून की रात 8:27 बजे से आर्द्रा नक्षत्र का शुभारंभ होगा। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी की तैयारियां तेज होने लगेंगी। भारतीय कृषि परंपरा में आर्द्रा नक्षत्र को मानसून के आगमन और खरीफ फसलों की बुआई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। किसानों की मान्यता है कि इस नक्षत्र के दौरान होने वाली अच्छी वर्षा धान समेत अन्य खरीफ फसलों के लिए लाभकारी साबित होती है।आर्द्रा नक्षत्र शुरू होते ही किसान खेतों की जुताई, मेड़बंदी और बीज की तैयारी में जुट जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत का संकेत माना जाता है। मौसम में नमी बढ़ने और मानसूनी हवाओं के प्रभाव से भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि किसान हर वर्ष इस अवधि का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी आर्द्रा नक्षत्र का विशेष महत्व है। आचार्य पं. विंध्याचल ओझा ने बताया कि इस अवधि में भगवान विष्णु, सूर्यदेव और भगवान शिव की पूजा-अर्चना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में आर्द्रा नक्षत्र को भगवान नारायण से जुड़ा हुआ माना गया है। इस दौरान भगवान सत्यनारायण की कथा, विष्णु पूजन, जप-तप तथा दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।आचार्य के अनुसार श्रद्धालु इस अवधि में गंगा स्नान, जरूरतमंदों की सहायता तथा धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। वहीं भगवान शिव का जलाभिषेक भी विशेष रूप से शुभ माना गया है।

आर्द्रा नक्षत्र के दौरान सात्विक भोजन की परंपरा भी देखने को मिलती है। घरों में खीर, चना दाल की पूड़ी, आम और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि मौसम के अनुरूप यह भोजन शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी होता है। इस प्रकार आर्द्रा नक्षत्र केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि कृषि, आस्था, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में देखा जाता है।

