अयोध्या का दिव्य क्षण जीवंत हुआ ठोरी पांडेयपुर में, राम जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबा जनसमूह

प्रखंड क्षेत्र के ठोरी पांडेयपुर गांव स्थित पश्चिम पोखरा परिसर का गौरीशंकर-राधेकृष्ण मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित है। यहां आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा ने पूरे गांव को मानो त्रेतायुग की पावन स्मृतियों से जोड़ दिया है। कथा के दूसरे दिन भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग जैसे ही प्रारंभ हुआ, वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा और पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा।

अयोध्या का दिव्य क्षण जीवंत हुआ ठोरी पांडेयपुर में, राम जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबा जनसमूह

-- पांच दिवसीय श्रीराम कथा में उमड़ा आस्था का सागर, ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर

केटी न्यूज/चौगाईं

प्रखंड क्षेत्र के ठोरी पांडेयपुर गांव स्थित पश्चिम पोखरा परिसर का गौरीशंकर-राधेकृष्ण मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित है। यहां आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा ने पूरे गांव को मानो त्रेतायुग की पावन स्मृतियों से जोड़ दिया है। कथा के दूसरे दिन भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग जैसे ही प्रारंभ हुआ, वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा और पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा।राष्ट्रीय कथावाचक पंडित मधुसूदन बिहारी जी ने अत्यंत ओजस्वी और भावपूर्ण शैली में राम जन्म का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम का अवतार केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन का दिव्य संदेश है।

उन्होंने बताया कि जब अयोध्या में दशरथ नंदन राम का प्राकट्य हुआ, तब देवताओं ने पुष्पवर्षा कर इस अलौकिक क्षण का अभिनंदन किया। कथावाचक के शब्दों के साथ श्रोताओं की भावनाएं भी उमड़ पड़ीं। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं तो कई आनंद में झूमते नजर आए।कथा के दौरान संगीतमय भजन-कीर्तन ने माहौल को और भी अधिक भक्तिमय बना दिया। ढोल-मंजीरे और मधुर स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते रहे। महिलाओं की बड़ी संख्या कथा स्थल पर उपस्थित रही, जिन्होंने पारंपरिक वेशभूषा में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। युवाओं और बच्चों की सहभागिता ने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।कथावाचक ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीराम का जीवन त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य का अनुपम उदाहरण है।

आज के सामाजिक परिवेश में यदि राम के आदर्शों को आत्मसात किया जाए, तो परिवार और समाज दोनों में शांति और सद्भाव स्थापित हो सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का संदेश है।आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था और प्रसाद वितरण का विशेष ध्यान रखा गया है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र धार्मिक उत्साह से सराबोर हो उठा है।पांच दिवसीय इस कथा के आगामी दिनों में श्रीराम के बाल्यकाल, गुरु आश्रम प्रवास, वनगमन और अन्य प्रेरक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। ठोरी पांडेयपुर में प्रवाहित यह भक्ति धारा न केवल गांव, बल्कि पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक चेतना से आलोकित कर रही है।